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“कीप फ्लोइंग” – अक्षय कुमार ने ब्रूस ली के सबक से खोला करियर लंबा चलाने का राज

हिमांशु राज

एक कॉन्क्लेव में सवालों का बेबाकी से जवाब देते हुए बॉलीवुड के खिलाड़ी अक्षय कुमार ने अपने चमकदार सफर की कहानी बयां की। 1987 में महेश भट्ट की ‘आज’ में महज 20 सेकंड का किरदार निभाने वाले इस सितारे ने मुस्कुराते हुए कहा, “कभी-कभी खुद को चिकोटी काटनी पड़ती है कि ये सब कैसे हुआ?”मार्शल आर्ट्स लेजेंड ब्रूस ली के दीवाने अक्षय ने करियर की लंबी पारी का मंत्र साझा किया- “जिंदगी को पानी की तरह रखो। कप में डालो तो कप बन जाता है, बोतल में तो बोतल। बस बहते रहो, जहां ले जाना हो, ले जाएगा।” उन्होंने उदाहरण दिया, “कभी ज्वार ऊंचा, तेज बहाव। कभी नीचा, सुस्त गति। स्थिर रहना भी ठीक, थोड़ा रुक जाओगे। मैंने कभी मंजिल का भ्रम नहीं पाला, बस आगे बढ़ते रहे।”फ्लॉप के काले दौर का खुलासा करते हुए बोले, “16-17 लगातार असफलताएं झेलीं, लेकिन अनुशासन ने संभाला। चार-पांच फिल्में हमेशा हाथ में रहतीं। प्रोड्यूसर को विश्वास चाहिए कि तुम समय पर पहुंचोगे, शूट पूरा करोगे और बेस्ट दोगे। ये अनुशासन करियर की नींव है।”सभागार में बैठे युवा कलाकारों को संदेश दिया, “उम्र कोई बाधा नहीं। प्रोड्यूसर का एक्टर बनो- अनुशासित, भरोसेमंद। इन्हीं सबकों ने मुझे आज यहां पहुंचाया।” अक्षय का ये ‘फ्लो’ दर्शन बॉलीवुड की अनिश्चितताओं में अनुकूलन और दृढ़ता का पाठ पढ़ाता है। उनका सफर संघर्ष से सफलता की मिसाल है।

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