मुख्यपृष्ठअपराधअंडरवर्ल्ड सीक्रेट : हसीना आपा के आशीर्वाद से बढ़ा था अबू सलेम

अंडरवर्ल्ड सीक्रेट : हसीना आपा के आशीर्वाद से बढ़ा था अबू सलेम

सूरज सिंह

हाल ही मे अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम के पेरोल की अर्जी मुंबई उच्च न्यायालय ने पास नहीं की, की भी तो इस शर्त पर की उसके पुलिस प्रोटेक्शन का खर्च सलेम खुद वहन करेगा। चर्चा में रहे अबू सलेम की कुछ ऐसी चीजों पर प्रकाश ड़ालते हैं जो बहुत कम लोग ही जानते हैं, इसके लिए हमको चलना पड़ेगा उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के एक छोटे से गांव सरायमीर, जहां से निकलकर मुंबई के अंडरवर्ल्ड की दुनिया में खौफ का नाम बनने तक का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। गरीबी और संघर्ष से निकलकर अपराध की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाना भी बड़ा काम है।
आजमगढ़ जिले के सरायमीर गांव (थाना सारायमीर) में जन्मे अबू सलेम का बचपन आर्थिक तंगी में बीता। पिता की असमय मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारी बढ़ गई। बेहतर भविष्य की तलाश में वह कम उम्र में ही मुंबई आ गया।
मुंबई में शुरुआती दिनों में उसने टैक्सी ड्राइवर, गैरेज मजदूर और स्पेयर पार्ट्स डिलिवरी बॉय जैसी छोटी-मोटी नौकरियां कीं, लेकिन यही संघर्ष धीरे-धीरे उसे अपराध की दुनिया की ओर ले गया।
मुंबई के कुर्ला-चेंबूर इलाके में उसकी मुलाकात दिलावर खान पठान से हुई, जो उस समय अंडरवर्ल्ड के डी-कंपनी से जुड़ा हुआ था।
दिलावर खान ने सलेम को छोटे-छोटे काम दिए, जैसे हथियार पहुंचाना, संदेश ले जाना और उगाही के कामों में मदद करना। यहीं से उसकी अंडरवर्ल्ड में एंट्री हुई।
१९९० के दशक में डी-कंपनी के प्रमुख धंधों में हथियारों की तस्करी, ड्रग्स और उगाही शामिल थे। इसी दौर में सलेम का प्रभाव तेजी से बढ़ने लगा। उसे दाऊद की बहन हसीना पारकर का भी समर्थन मिला।
धीरे-धीरे उसने दुबई और पाकिस्तान के कई दौरों के जरिए गैंग के बड़े काम संभालने शुरू कर दिए। फिल्म निर्माताओं से वसूली, रियल एस्टेट कारोबारियों पर दबाव और गैंग के नेटवर्क को विस्तार देने में उसकी अहम भूमिका रही।
अबू सलेम ने फिल्म इंडस्ट्री को उगाही का बड़ा जरिया बना लिया। उस दौर में कई फिल्म निर्माता, अभिनेता और संगीत कंपनियां उसकी धमकियों का शिकार हुईं।
संगीत उद्योग के बड़े नाम गुलशन कुमार की हत्या के मामले में भी उसका नाम सामने आया, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।
मुंबई के अंधेरी, बांद्रा, मालाड, कुर्ला, सांताक्रुज और मीरा रोड-वसई जैसे इलाकों में भी सलेम का नेटवर्क सक्रिय रहा। बिल्डरों से जबरन साझेदारी, जमीन कब्जा और प्रोजेक्ट्स में हिस्सा मांगना उसकी रणनीति का हिस्सा बन गया। समय के साथ सलेम और दाऊद इब्राहिम के बीच मतभेद बढ़ने लगेगा। सूत्रों के अनुसार, इसके पीछे कई कारण बताए जाते हैं। उसकी निजी जिंदगी और बढ़ती ऐशो-आराम की जीवनशैली से दोनों के बीच दूरी बढ़ती गई और सलेम ने अपना अलग नेटवर्क बना लिया।
फरारी और गिरफ्तारी
१९९३ से २००२ के बीच सलेम ने नेपाल, दुबई और अन्य देशों में लगातार ठिकाने बदलते हुए फरारी काटी। आखिरकार २००२ में वह अपनी साथी मोनिका बेदी के साथ पुर्तगाल में गिरफ्तार कर लिया गया।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद २००५ में भारत सरकार उसे पुर्तगाल से प्रत्यर्पित कराने में सफल रही। प्रत्यर्पण समझौते के तहत यह शर्त मानी गई कि उसे भारत में मृत्युदंड नहीं दिया जाएगा।
आज अबू सलेम मुंबई की जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। उसके खिलाफ कई मामले हैं!

अन्य समाचार