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म्हाडा भूखंड घोटाला या ‘लक्ष्मी दर्शन’ अभियान? – नासिक पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

गरीबों के घरों पर डाका डालने वालों को सजा मिले, लेकिन निर्दोष बिल्डरों को जांच के नाम पर परेशान क्यों किया जा रहा है?

सामना संवाददाता / नासिक 

नासिक में इन दिनों चर्चित म्हाडा भूखंड अनियमितता प्रकरण ने शहर के निर्माण क्षेत्र में भारी हलचल पैदा कर दी है। ४ हजार वर्गमीटर से कम क्षेत्र के कृत्रिम टुकड़े कर, गृहनिर्माण योजना के लिए अनिवार्य २० प्रतिशत भूमि म्हाडा को उपलब्ध न कराकर शासन, राजस्व तथा भूमि अभिलेख विभाग के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप में कई बिल्डरों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। इस प्रकरण में शहर के कुछ बड़े बिल्डरों पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सात बिल्डरों के बयान दर्ज करने के लिए हिरासत में लिया, ऐसी जानकारी सूत्रों ने दी है।

इस पूरे मामले में आडगांव, म्हसरूल, दसक, देवलाली, विहितगांव, नांदूर, गंगापुर और चेहड़ी क्षेत्रों के लगभग १०८ मामलों के दस्तावेज पुलिस ने मंगवाए हैं। तलाठी और मंडल अधिकारी कार्यालय की नोंदों की जांच के दौरान लगभग १५ बिल्डरों द्वारा नियमों का उल्लंघन किए जाने की बात प्राथमिक जांच में सामने आने का दावा किया जा रहा है। लेकिन इस जांच प्रक्रिया को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जांच या दबाव की रणनीति?

नासिक शहर के कई बिल्डरों का कहना है कि म्हाडा भूखंड घोटाले की जांच के नाम पर पुलिस सभी को एक ही तराजू में तौल रही है। दोषी और निर्दोष के बीच अंतर किए बिना कई बिल्डरों को पुलिस थानों में बुलाया जा रहा है। कुछ बिल्डरों का आरोप है कि उनसे इस प्रकार के सवाल पूछे जा रहे हैं –“आपके खिलाफ सबूत हैं… मामला दर्ज करें क्या? या ऐसा हल्का मामला लगाएं जिसमें आपको जमानत मिल जाए?” इस तरह के संकेतों के माध्यम से दबाव बनाया जा रहा है, ऐसी चर्चा निर्माण क्षेत्र में फैल रही है। इस कारण ईमानदार बिल्डरों में भी भय और असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया है।

८० वर्षीय बिल्डर को भी रातभर पुलिस थाने में बैठाया?
जांच के दौरान एक ८० वर्षीय बिल्डर और उसके परिवार के सदस्यों, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, को रातभर पुलिस थाने में बैठाकर रखने का आरोप भी सामने आया है। इस घटना से शहर के निर्माण क्षेत्र में रोष व्यक्त किया जा रहा है। बिल्डरों का कहना है कि दोषियों को सजा मिलनी ही चाहिए, लेकिन जांच के नाम पर निर्दोष लोगों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना उचित नहीं है।

तेलगी प्रकरण की यादें ताजा?
नासिक पुलिस की इस कार्रवाई से कुछ लोगों को स्टांप पेपर घोटाले के आरोपी अब्दुल करीम तेलगी प्रकरण की जांच के समय की घटनाएं याद आ रही हैं। उस समय जांच के नाम पर कई पुलिस अधिकारियों द्वारा कथित रूप से लाभ उठाने के आरोप लगे थे, जिससे महाराष्ट्र पुलिस की छवि काफी धूमिल हुई थी।
अब म्हाडा भूखंड जांच के बहाने वैसी ही स्थिति दोहराए जाने की आशंका कुछ बिल्डरों द्वारा व्यक्त की जा रही है।

मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
नासिक के ईमानदार डेवलपर्स का स्पष्ट कहना है कि गरीबों के लिए आरक्षित म्हाडा आवास हड़पने वालों को कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए। लेकिन जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार के दबाव या अवैध वसूली के आरोप न लगें।इसीलिए डेवलपर्स ने मांग की है कि मुख्यमंत्री और गृहमंत्री इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें और पूरी जांच प्रक्रिया की निगरानी कर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें।

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