धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
राज्य में महायुति सरकार जिस ‘सुपर हेल्थ सिस्टम’ का ढोल पीट रही है, उसकी हकीकत अब धीरे-धीरे सामने आने लगी है। महायुति सरकार ने आर्थिक रिपोर्ट में दावा किया है कि राज्य में त्रिस्तरीय स्वास्थ्य ढांचा तैयार किया गया है, जिसमें उपकेंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर उपजिला अस्पताल, जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज से जुड़े सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल शामिल हैं। लेकिन इन संस्थानों की वास्तविक स्थिति को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। आयुष्मान, आरोग्य मंदिर और कई स्वास्थ्य योजनाओं के बड़े-बड़े दावों के बावजूद महाराष्ट्र का स्वास्थ्य तंत्र खुद वेंटिलेटर पर नजर आ रहा है। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी, जरूरी उपकरणों का अभाव और बदहाल बुनियादी सुविधाओं के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। हालात इतने खराब हैं कि साधारण इलाज के लिए भी लोगों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक भटकना पड़ रहा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ३१ दिसंबर २०२५ तक राज्य में १०,६८८ उपकेंद्र, १,५२३ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, ३०४ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, १०४ उपजिला अस्पताल और ३० जिला अस्पताल मौजूद हैं। इसके अलावा ३७ मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पताल, ८ सामान्य अस्पताल, २३ महिला अस्पताल, ४ मानसिक रोग अस्पताल, २ कुष्ठ रोग अस्पताल, ५ टीबी अस्पताल और २ विशेष सेवा अस्पताल भी संचालित किए जा रहे हैं। कागजों पर यह नेटवर्क विशाल दिखता है। लेकिन कई अस्पतालों में डॉक्टर, नर्स और आवश्यक उपकरणों की भारी कमी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। सरकार ने अक्टूबर २०२१ से प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के तहत स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने का दावा किया है। इसके तहत जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाएं स्थापित करने, १०० और ५० बेड़ों वाले आवश्यक सेवा अस्पताल ब्लॉक बनाने और रोग निगरानी प्रणाली को मजबूत करने की योजना है। इसी तरह शहरी गरीबों के लिए ‘हिंदुहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे आपला दवाखाना’ योजना के तहत ६४५ क्लिनिक शुरू किए गए हैं, जहां मुफ्त जांच, दवाएं, टेली-कंसल्टेशन और गर्भवती महिलाओं की जांच की सुविधा दी जा रही है। वहीं उपकेंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को बदलकर १२,१३३ ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ शुरू किए जाने का दावा किया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, संक्रामक और असंक्रामक रोगों पर नियंत्रण तथा मातृ और शिशु स्वास्थ्य सुधारने के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत ६६,०८८ चिकित्सा अधिकारी, ६४,६०८ आशा स्वयंसेविकाएं, टेलीमेडिसिन सेवाएं और सिकल सेल रोग नियंत्रण कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं। मातृ और शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जन्मदर, मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
