-प्लॉट लीज और बॉन्ड पर भी चर्चा
-शिक्षा अनुदान और टैक्स बकाए का
-विधानपरिषद में गरमाया मुद्दा
सामना संवाददाता / मुंबई
विधानपरिषद में तारांकित प्रश्न के दौरान मुंबई मनपा की वित्तीय स्थिति पर तीखी चर्चा हुई। मनपा को विभिन्न विभागों से मिलने वाले लगभग १०९४८.५८ हजार करोड़ रुपए से अधिक के बकाए का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया गया। विपक्षी सदस्यों ने सवाल किया कि जब इतनी बड़ी राशि बकाया है, तब मुंबई के विकास कार्यों पर इसका क्या असर पड़ेगा। चर्चा के दौरान प्लॉट लीज पर देने और बॉन्ड के माध्यम से निधि जुटाने के प्रस्तावों का भी उल्लेख हुआ, जबकि शिक्षा अनुदान और टैक्स बकाए की रकम को लेकर सरकार और मनपा के आंकड़ों में अंतर पर भी सवाल उठाए गए। विपक्ष ने सरकार से स्पष्ट समयसीमा बताते हुए बकाया राशि जल्द देने की मांग की।
सदन में शिवसेना के विधानपरिषद सदस्य सुनील शिंदे ने कहा कि मनपा ने अपने बजट में स्पष्ट किया है कि कई विभागों से बड़ी रकम आनी बाकी है। जब इतनी बड़ी रकम बकाया है, तब मनपा को आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण प्लॉट लीज पर देने और बॉन्ड के माध्यम से फंड जुटाने जैसे कदम क्यों उठाने पड़ रहे हैं। उन्होंने पूछा कि इस स्थिति में भविष्य में मनपा की वित्तीय हालत क्या होगी और सरकार इस मामले में अपनी जिम्मेदारी कैसे निभाएगी। चालू वित्तीय वर्ष में इस बकाए का भुगतान करने को लेकर कोई सकारात्मक निर्णय या समयबद्ध कार्यक्रम तय किया जाएगा या नहीं। इसके साथ ही मुंबई में करीब २० बड़े संपत्ति कर बकायेदारों का मुद्दा भी उठाया गया। बताया गया कि मनपा द्वारा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की है और उनकी संपत्तियां जब्त करने की चेतावनी दी गई है। सदन में सवाल किया गया कि अब तक कितने बकायेदारों की संपत्तियां वास्तव में जब्त की गई हैं।
शिवसेना हुई आक्रामक
मंत्री के इस जवाब से शिवसेना असंतुष्ट और आक्रामक दिखाई दी। शिवसेना सदस्य एड. अनिल परब ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि शिक्षा विभाग के करीब ७,००० करोड़ रुपए बकाया हैं और यह विवाद जल्द सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्लॉट लीज से राजस्व बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। छत्रपति शिवाजी महाराज मंडी परिसर की जमीन मेसर्स वाय.एम. इंप्रâा को देने से ३६९ करोड़ रुपए मिलेंगे, जबकि अस्फाल्ट प्लांट की जमीन इंदावती रियल प्राइवेट लिमिटेड को देने से कुल ७८३ करोड़ रुपए का प्रीमियम प्राप्त होगा। इन दोनों परियोजनाओं से बीएमसी को करीब १,१५२ करोड़ रुपए का राजस्व मिलने की उम्मीद है। सदन में मीठी नदी परियोजना और कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा भी गरमाया। परब ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक फंड में भ्रष्टाचार ही असली `गद्दारी’ है और मुंबईकरों के टैक्स के पैसों का सही उपयोग होना चाहिए।
