नागेंद्र शुक्ला / मुंबई
मुंबई की पुरानी चॉलों में बीती चार पीढ़ियों की यादें और संघर्ष अब धीरे-धीरे नए टावरों में बदलते नजर आ रहे हैं। बी डीडी चॉल पुनर्विकास परियोजना के तहत नायगांव में रहने वाले ८६४ परिवारों को नए घरों की चाबी देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आगामी दिनों में नायगांव, वरली और ना. म. जोशी मार्ग की कुल १५,५९३ बीडीडी चॉल में रहने वाले परिवारों का पुनर्वसन वर्ष २०२९ तक पूरा कर लिया जाएगा।
गौरतलब है कि कल बाबासाहेब आंबेडकर संकुल में आयोजित चाबी वितरण का पहला पड़ाव का कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उनके साथ उप मुख्यमंत्री भी मौजूद थे। कार्यक्रम में प्रतीकात्मक रूप से १२ परिवारों को चाबी सौंपी गई, जबकि बाकी परिवारों को प्रोजेक्ट स्थल से चरणबद्ध तरीके से घरों का कब्जा दिया जाएगा।
१६० वर्गफुट से ५०० वर्गफुट तक का सफर
इस परियोजना के तहत चॉलों में रहने वाले परिवारों को १६० वर्गफुट के पुराने कमरों की जगह ५०० वर्गफुट के आधुनिक फ्लैट मुफ्त दिए जा रहे हैं। नई इमारतों में लिफ्ट, पार्विंâग, खुली जगह और अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बीडीडी चॉल निवासियों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा, आपके माता-पिता और दादा-दादी ने कठिन परिस्थितियों में चॉलों में जीवन बिताया है। आज जो घर आपको मिल रहा है, वह उनके संघर्ष का फल है। किसी भी परिस्थिति में इस घर को बेचने की गलती मत कीजिए।
बता दें करीब चार दशक से बीडीडी चॉल पुनर्विकास का सपना अधूरा था म्हाडा के माध्यम से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। आज तीनों इलाकों में तेजी से ऊंची और आधुनिक इमारतें खड़ी हो रही हैं।
पुलिस परिवारों को भी मिलेगा घर
इस परियोजना में २,००० से अधिक पुलिस परिवारों को भी घर मिलेंगे। सरकार ने पुलिसकर्मियों के लिए १५ लाख रुपए में घर देने का निर्णय लिया है।
पार्किंग और मंदिर का भी समाधान
नायगांव के निवासियों ने हर घर के लिए एक पार्विंâग की मांग उठाई, जिस पर मुख्यमंत्री ने सकारात्मक समाधान का भरोसा दिया। साथ ही भवानी माता मंदिर के पुनर्वसन के लिए ९०० वर्गफुट जगह देने की घोषणा भी की गई।
अब सीढ़ियां नहीं चढ़नी पड़ेंगी
७२ वर्षीय निवासी छबुबाई कांबले की खुशी उनके शब्दों में साफ झलकती है। उन्होंने कहा, ‘मैं १९७० में शादी के बाद बीडीडी चॉल में आई थी। हमारी चार पीढ़ियां १६० वर्गफुट के कमरे में रहीं। अब ५०० वर्गफुट के नए घर में जा रहे हैं। इस उम्र में अब चार-चार मंजिल की सीढ़ियां नहीं चढ़नी पड़ेंगी। यह हमारे लिए नई जिंदगी की शुरुआत है। मुंबई के सबसे बड़े पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स में से एक बीडीडी चॉल परियोजना अब हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की नई इमारत बनती जा रही है।
