उमेश गुप्ता / वाराणसी
सात वार में नौ त्योहार मनाने वाले बनारस की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के अभिन्न अंग बुढ़वा मंगल में लोक के महामंगल की कामना का स्वर मुखर हुआ। मंगलवार को अस्सी घाट पर काव्यार्चन के तहत यह आयोजन काव्य मंगल, सम्मान मंगल और सुर मंगल नामक तीन सत्रों में संपन्न हुआ। महोत्सव का शुभारंभ संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार के लिए चयनित काशी के पंडित जवाहर लाल और उनके साथियों ने शहनाई की मंगल ध्वनि से किया।
सुबह ए बनारस आनंद कानन की ओर से आयोजित इस लोक पर्व में शामिल काशीवासियों का स्वागत संस्थापक सचिव डॉ रत्नेश वर्मा ने किया। उन्होंने बुढ़वा मंगल के ऐतिहासिक पक्ष पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसके बाद काव्य मंगल सत्र में काशी के कवियों ने कविता, गीत, गजल, छंद और मुक्तक के माध्यम से लोक के महामंगल की कामना की। वहीं सुर मंगल सत्र में लोक और उपशास्त्रीय संगीत के जरिए यही भाव अभिव्यक्त हुआ। इन दोनों सत्रों के बीच सम्मान मंगल का संक्षिप्त आयोजन भी हुआ, जिसमें देश की पहली एसिड अटैक सर्वाइवर प्रो मंगला कपूर को सम्मानित किया गया। हाल ही में उन्हें पद्मश्री के लिए चयनित किया गया है।
काव्य मंगल सत्र में 12 कवियों और 12 कवयित्रियों ने काव्य पाठ किया। काव्य पाठ करने वाली मातृशक्तियों में डॉ मंजरी पांडेय, छाया शुक्ला, प्रो वत्सला श्रीवास्तव, डॉ नसीमा निशा, डॉ मधुलिका राय, ऋतु दीक्षित, राजलक्ष्मी मिश्रा मन, कंचनलता चतुर्वेदी, प्रियंका अग्निहोत्री गीत, चेतना तिवारी, मधु पांडेय मृदुला और साधना शाही शामिल रहीं। कवियों में डॉ ओमप्रकाश श्रीवास्तव प्रकाश मिर्जापुरी, पंडित हीरालाल मिश्र मधुकर, प्रो इंदीवर पांडेय, पंडित सूर्यप्रकाश मिश्र, डॉ अत्रि भारद्वाज, परमहंस तिवारी परम, दिनेशदत्त पाठक, विजयचंद्र त्रिपाठी, गिरीशचंद्र पांडेय काशीकेय, डॉ धर्मनाथ मिश्र, डॉ प्रताप शंकर दूबे और डॉ विंध्याचल पांडेय सगुन शामिल रहे।
इस सत्र की शुरुआत काशी के दिवंगत साहित्यकार पंडित अशोक मिश्र सामयिक द्वारा 55 वर्ष पूर्व रचित बुढ़वा मंगल की आरती से हुई। देवाधिदेव महादेव को समर्पित “ओम जय बुढऊ बाबा, ओम जय बुढवा मंगल…” आरती का गायन अरविंद मिश्र हर्ष, डॉ नागेश शांडिल्य और एडवोकेट रुद्रनाथ त्रिपाठी पुंज ने किया।
गुलाब की पंखुड़ियों और गुलाब जल की वर्षा के बीच सुर मंगल सत्र की शुरुआत आकाशवाणी के टॉप ग्रेड गायक डॉ विजय कपूर के लोक गायन से हुई। उन्होंने चैती और होरी के विविध रंग प्रस्तुत किए। “अवध में बाजे ला बधइया हो रामा”, राग काफी में “होरी खेलत नंद कुमार”, “बरजोरी करो न मोसे होरी में” और “खेलैं मसाने में होरी दिगंबर” जैसी रचनाओं के माध्यम से लोक साहित्य की भावधारा श्रोताओं तक पहुंचाई।
इसके बाद बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय की डॉ मधुमिता भट्टाचार्य ने राग मिश्र पहाड़ी में दादरा “रंगी सारी गुलाबी चुनरिया रे”, होरी “ऐसी होरी ना खेलो कन्हाई” और चैती “रे बैरन रे कोयलिया” प्रस्तुत कर बनारस घराने की गायकी का रंग बिखेरा। उनके साथ तबला पर पंकज राय, बांसुरी पर सुधीर कुमार गौतम, साइड रिदम पर संजय श्रीवास्तव और हारमोनियम पर डॉ पंकज शर्मा ने संगत की।
इस सत्र का संचालन अंकिता खत्री ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रमोद मिश्र ने किया। बुढ़वा मंगल के इस आयोजन में काव्यार्चन परिवार के 170 सदस्यों सहित बड़ी संख्या में काशीवासी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सजीव प्रसारण यूट्यूब चैनल “बनारसी किस्से” पर किया गया।
इस अवसर पर भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रपौत्री दिपाली चौधरी, बीएचयू के प्राचीन इतिहास विभाग की पूर्व अध्यक्ष नंदिनी वर्मा, चिकित्सा विज्ञान विभाग के पूर्व निदेशक प्रो टीएन महापात्र, अभय श्रीवास्तव, श्याम केशरी, डॉ जयप्रकाश मिश्र, पंडित सूर्यप्रकाश मिश्र और प्रसन्न वदन चतुर्वेदी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
