मुख्यपृष्ठस्तंभपूर्वांचल पॉलिटिक्स : पसरता ब्राह्मण आक्रोश, सरकार मदहोश

पूर्वांचल पॉलिटिक्स : पसरता ब्राह्मण आक्रोश, सरकार मदहोश

हिमांशु राज
उत्तर प्रदेश पुलिस दारोगा भर्ती परीक्षा के प्रश्न पत्र में `पंडित’ शब्द को विकल्प के रूप में शामिल करने से ब्राह्मण समुदाय में भारी आक्रोश पैâल रहा है। इसे प्रत्यक्ष अपमान मानते हुए ब्राह्मण संगठन सड़कों पर उतर आए हैं तथा बनारस, कानपुर, लखनऊ और प्रयागराज की गलियां विरोध प्रदर्शनों से गूंज रही हैं। सोशल मीडिया पर पंडित अपमान तथा ब्राह्मण एट्रोसिटी जैसे हैशटैग तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं, जबकि राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे योगी आदित्यनाथ सरकार के लिए जातिगत संकट की शुरुआत बता रहे हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति हमेशा जातिगत समीकरणों पर आधारित रही है, जिसमें ब्राह्मणों की लगभग दस प्रतिशत आबादी निर्णायक भूमिका निभाती है। जिस दल के साथ यह समुदाय खड़ा होता है, सत्ता उसी की झोली में आ जाती है। भाजपा को कल्याण सिंह से योगी आदित्यनाथ तक मजबूत आधार प्रदान किया, वहीं समाजवादी पार्टी-बहुजन समाज पार्टी के दौर में भी प्रमाण मौजूद हैं—मायावती के साथ २००७ का गठजोड़ पूर्ण बहुमत वाली सरकार बना, जबकि अखिलेश यादव के साथ जुड़ाव से २०१२ में सपा सत्ता में आ गई। हालांकि, वर्तमान योगी सरकार में ब्राह्मण खुद को लगातार वंचित महसूस कर रहे हैं और प्रश्न पत्र का `पंडित’ विकल्प ताजा घाव साबित हुआ है। प्रयागराज माघ मेला के दौरान शंकराचार्य प्रकरण में चोटी पकड़कर पटकना, बटुक भिक्षुओं का अपमान तथा यूजीसी नीतियों में ब्राह्मण आरक्षण की उपेक्षा जैसी घटनाएं आक्रोश को चरम पर ले गईं। ब्राह्मण महासभा ठाकुर वर्चस्व के चलते समुदाय को हाशिए पर धकेले जाने का आरोप लगा रही है। विपक्ष ने इस अवसर को लपक लिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे `सिस्टमेटिक ब्राह्मण-विरोधी साजिश’ करार दिया, जबकि बहुजन समाज पार्टी व कांग्रेस २०२७ विधानसभा चुनाव का मुख्य मुद्दा बनाने की तैयारी में हैं। ब्राह्मण नेताओं की चेतावनी है कि भाजपा को ब्राह्मण वोटों का गंभीर नुकसान हो सकता है। यह प्रभाव २०२७ चुनाव में क्षेत्रीय ब्रेकडाउन के रूप में दिखेगा। पूर्वांचल में बनारस-गोरखपुर की ५० से अधिक ब्राह्मण-बहुल सीटें खतरे में हैं जहां भाजपा पहले से कमजोर है; अवध क्षेत्र में लखनऊ-पैâजाबाद से सपा को सीधा लाभ मिलेगा तथा पश्चिमी यूपी में जाट-ब्राह्मण गठजोड़ से बसपा मजबूत होगी। कुल ८०-९० सीटें प्रभावित हो सकती हैं, जिससे भाजपा का बहुमत संकट में पड़ सकता है तथा सवर्ण आधार अपर्याप्त सिद्ध होगा। भाजपा सरकार बैकफुट पर आ चुकी है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने जांच के आदेश जारी किए हैं, लेकिन विलंब से आग पर तेल छिड़क दिया गया है। उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक सहित प्रमुख ब्राह्मण चेहरे असहज मौन पर सपा सरकार के पूर्व मंत्री मनोज राय धूपचंडी ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा है कि यदि उनमें हैसियत है और वे ब्राह्मण हैं, तो उन्हें शंकराचार्य के खिलाफ दर्ज मुक़दमा वापस लेकर दिखाना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषक चेताते हैं कि शंकराचार्य कांड से यूजीसी विवाद तक का सिलसिला सत्ता-भक्षक बन चुका है तथा `सबका साथ, सबका विकास’ नारा संकट में फंस गया है। सत्ताधारी सरकार को तत्काल ब्राह्मण नेताओं से संवाद, सार्वजनिक माफी और नीतिगत सुधार अनिवार्य करने होंगे, वरना जातिगत ध्रुवीकरण अस्वीकार्य रूप धारण कर लेगा। यह ब्राह्मण उबाल उत्तर प्रदेश की राजनीति को नया आकार दे सकता है, क्योंकि न्याय ही सत्ता का स्थायी सूत्र है।

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