अनिल मिश्र/रांची
महामंडलेश्वर अघोराचार्य हरे राम ब्रह्मचारी उर्फ बोरिया बाबा का कल अमावस्या के दिन एक सौ पच्चीस वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने नर्मदा नदी के तट पर स्थित अपने आश्रम में अंतिम सांस ली। जानकारी के अनुसार उनकी समाधि भी उसी आश्रम परिसर में बनाई जाएगी। उनके निधन की खबर से देशभर में फैले अनुयायियों और संत समाज में शोक की लहर दौड़ गई है।
झारखंड के मां छिन्नमस्तिका मंदिर क्षेत्र में दामोदर और भैरवी नदियों के संगम के समीप बोरिया बाबा का प्रमुख आश्रम स्थित है। यहीं से उन्होंने अपनी साधना, आराधना और तपस्या की शुरुआत की थी। रजरप्पा स्थित यह आश्रम उनके आध्यात्मिक जीवन का केंद्र रहा, जहां उन्होंने वर्षों तक कठोर तप कर व्यापक पहचान हासिल की।
बाबा का आध्यात्मिक प्रभाव कई राज्यों तक फैला हुआ था। पश्चिम बंगाल के बीरभूम में उनका आश्रम है, वहीं बिहार के भागलपुर जिले के कहलगांव में गंगा नदी के किनारे भी उनका आश्रम स्थापित है। इसके अतिरिक्त उन्होंने हिमालय पर्वतों में भी लंबे समय तक साधना की, जिसे उनके अनुयायी उनकी तपस्या का महत्वपूर्ण काल मानते हैं।
