मुख्यपृष्ठनए समाचार संपादकीय : अमेरिका को पाकिस्तान से डरने की क्या जरूरत है?

 संपादकीय : अमेरिका को पाकिस्तान से डरने की क्या जरूरत है?

ईरान का परमाणु हथियार कार्यक्रम अमेरिका और इजरायल के लिए खतरनाक साबित हो सकता है, ऐसा महसूस होने पर दोनों राष्ट्रों ने ईरान पर हमले किए। युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है। फिलहाल, इसके खत्म होने के कोई संकेत नहीं हैं। अगर किसी देश के पास परमाणु हथियार और मिसाइल बनाने का कार्यक्रम है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह दूसरे देशों पर हमला करने के लिए ही ऐसा कर रहा है। ऐसे परमाणु कार्यक्रम राष्ट्र की रक्षा के लिए चलाए जाते हैं, लेकिन अमेरिका ने इस संबंध में चौधराहट झाड़ने की जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है और इजरायल जैसे देश इस काम में अमेरिका का सहयोग कर रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में एक नई खतरनाक जानकारी बम की तरह फटी है। तुलसी गबार्ड अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया संगठन की निदेशक हैं। कल उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान और चीन का गठबंधन अमेरिका के लिए खतरनाक है। तुलसी गबार्ड ने सीनेट पैनल के सामने घोषित किया कि पाकिस्तान अपना मिसाइल कार्यक्रम तेजी से बढ़ा रहा है और चीन के समर्थन से चल रहा यह कार्यक्रम अमेरिका की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के लिए खतरनाक साबित होगा। तुलसीबाई ने जो बताया उसे भारतीय विदेश और रक्षा मंत्रालय को कान साफ करके सुनना चाहिए। क्योंकि पाकिस्तान यदि अपना परमाणु कार्यक्रम चला रहा है तो भारत के अस्तित्व को सबसे ज्यादा खतरा है। तुलसी गबार्ड कहती हैं कि २०३५ तक १६ हजार से ज्यादा मिसाइलें अमेरिका के घर में घुस सकती है। पाकिस्तान के बढ़ते लंबी दूरी के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के कारण अमेरिका की भूमि पर सीधा हमला हो सकता है। पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम हमेशा भारत के लिए खतरनाक माना जाता है, लेकिन अब वह
अमेरिका के लिए भी खतरनाक
बन रहा है, ऐसा उनकी खुद की ही खुफिया एजेंसी का मूल्यांकन और निरीक्षण है। तुलसी गबार्ड के इस बयान को सबसे पहले भारत को गंभीरता से लेना चाहिए। ईवीएम पर मतदान पद्धति से घोटाले ही घोटाले हो सकते हैं, ऐसा अंतर्राष्ट्रीय मंच पर बोलने वाली यही तुलसी गबार्ड हैं और भारत में ‘ईवीएम’ घोटाले से भाजपा की सरकारें लगातार बन रही हैं। तुलसी इस वास्तविकता को परखकर बोलती हैं। तुलसी गबार्ड अमेरिका की तत्कालीन कांग्रेस सदस्य और २०२० की ‘डेमोक्रेटिक प्रेसिडेंशियल’ उम्मीदवार थीं। २०२४ के चुनाव के बाद डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में उन्हें राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (Director of National Intelligence – DNI) के रूप में नियुक्त किया गया। पहले वे ‘No war with Iran’ की समर्थक थीं। अब उन्होंने भूमिका बदलकर ईरान से अमेरिका को खतरा होने की बात कही है। उन्होंने अब बताया कि अमेरिका का सुरक्षित परमाणु प्रतिरोध (Nuclear deterrent) देश की सुरक्षा के लिए समर्थ और पर्याप्त है, लेकिन रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान ये देश नॉवेल, एडवांस्ड या पारंपरिक मिसाइल डिलिवरी सिस्टम विकसित कर रहे हैं, जिसमें परमाणु हथियार और मिसाइलें हो सकती हैं। ये खतरनाक मिसाइलें हमारी मातृभूमि तक पहुंच सकती हैं। गबार्ड के शोध का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि पाकिस्तान की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल के विकास में ICBM (Intercontinental Ballistic Missile) का समावेश निश्चित रूप से हो सकता है, जिनकी मारक क्षमता अमेरिका की भूमि तक पहुंच सकती है।
पाकिस्तान के पास फिलहाल
शाहीन-३ और अबाबील जैसी मिसाइलें हैं, जिनकी मारक क्षमता २,७५० किलोमीटर तक है, लेकिन अब वह ICBM विकसित होने पर साधारणत: छह हजार किलोमीटर तक जाने की दिशा में है। अमेरिकन खुफिया एजेंसियों की जानकारी है कि २०३५ तक जिन पांच देशों के पास मिसाइलों की संख्या तीन हजार है और १६ हजार से ज्यादा होने वाली है, उनमें पाकिस्तान शामिल है। पाकिस्तान जो कभी अमेरिका का स्ट्रैटेजिक पार्टनर था, वह अब परमाणु खतरे की सूची में शामिल हो गया है। ऐसे समय में भारत आखिरकार है कहां? पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कमजोर होते हुए भी वह परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर ज्यादा खर्च कर रहा है। यह आर्थिक और तकनीकी बल भारत द्वारा नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान और अफगानिस्तान में फिलहाल युद्ध शुरू है। पहलगाम हमले के बाद भारत द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ शुरू किया हुआ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अमेरिका के दबाव के कारण अधूरा छोड़ना पड़ा और प्रेसिडेंट ट्रंप ने पाकिस्तानी जनरलों की तारीफ करके उन्हें ‘व्हाइट हाउस’ में सम्मानपूर्वक डिनर पर बुलाया। फिलहाल, भारत के शासक सदैव चुनावी प्रचार में व्यस्त हैं, जबकि पाकिस्तान परमाणु कार्यक्रम बढ़ा रहा है। भारत को सबक सिखाने के लिए यह परमाणु कार्यक्रम कल क्रियान्वित किया जाएगा। कभी अमेरिका की मदद पर निर्भर रहनेवाले पाकिस्तान से अब अगर अमेरिका को डर लग रहा है तो प्रधानमंत्री मोदी को चिंता करनी चाहिए, ऐसा यह मामला है। भारत को अब अपने मिसाइल डिफेंस (S-400, BMD) और Nuclear trial को और अधिक मजबूत करना आवश्यक है। वैश्विक नेताओं को सिर्फ गले लगाने से देश मजबूत नहीं होता। शांति और सुरक्षा चाहिए तो देश को परमाणु शक्ति और शस्त्र बल में मजबूत करना पड़ता है। वरना ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अधूरा छोड़ना पड़ता है।

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