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अंडरवर्ल्ड सीक्रेट :  जब आईएसआई ने बनाया था छोटा राजन की हत्या का प्लान

सूरज सिंह

१९ सितंबर २००० मुंबई अंडरवर्ल्ड के इतिहास में वह दौर बेहद खतरनाक माना गया, जब इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) ने कुख्यात गैंगस्टर छोटा राजन की हत्या के लिए सुनियोजित साजिश रची थी। बैंकॉक में हुए हमले की जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ था कि इस पूरे ऑपरेशन के पीछे आईएसआई की बड़ी भूमिका थी, जिसने दाऊद इब्राहिम के गिरोह को न केवल योजना बनाने में मदद दी, बल्कि संसाधन और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी उपलब्ध कराया था।
जानकारी के अनुसार, हमलावरों को कराची से बैंकॉक तक पहुंचाने के लिए विशेष विमान की व्यवस्था की गई थी, जिसमें एक बड़े मादक पदार्थ तस्कर की भूमिका सामने आई थी। इस हमले में अत्याधुनिक हथियार, जैसे क्लाश्निकोव राइफलें और भारी धनराशि भी मुहैया कराई गई थी।
छोटा राजन को खत्म करने के पीछे कई कारण बताए गए थे। उस समय राजन ने दक्षिण-पूर्व एशिया में मादक पदार्थों के कारोबार में अपनी पकड़ बनानी शुरू कर दी थी। उसने मलेशिया, थाईलैंड और अफगान सीमा से जुड़े तस्करों के साथ गठजोड़ कर लिया था, जिससे आईएसआई और दाऊद गिरोह के स्थापित नेटवर्क को सीधा नुकसान हो रहा था।
दूसरा बड़ा कारण यह था कि राजन लगातार दाऊद गिरोह से जुड़े फाइनेंसरों, गुंडों और बम धमाकों के आरोपियों को निशाना बना रहा था। उसने सार्वजनिक रूप से ऐलान किया था कि वह इन सभी को खत्म करेगा। इससे दाऊद गिरोह के सदस्यों में भय का माहौल बन गया था और उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए दाऊद से गुहार लगाई थी।
आईएसआई के लिए भी छोटा राजन एक बड़ी बाधा बन चुका था। माना जाता था कि राजन के लोग भारत में सक्रिय आईएसआई नेटवर्क की जानकारी खुफिया एजेंसियों और पुलिस तक पहुंचा रहे थे, जिससे कई साजिशें नाकाम हो रही थीं। इसी कारण आईएसआई ने राजन को खत्म करना जरूरी समझा था, ताकि भारत में उसकी गतिविधियां बिना रुकावट जारी रह सकें। इस साजिश के तहत भारत और दुबई से कई हमलावर कराची पहुंचे और वहां से बैंकॉक के लिए रवाना हुए। बाद में उन्होंने बैंकॉक के सुकुमवित क्षेत्र स्थित एक इमारत में घुसकर छोटा राजन पर हमला किया था। हालांकि, इस हमले में राजन गंभीर रूप से घायल हुआ, लेकिन उसकी जान बच गई थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि उस समय छोटा राजन की हत्या हो जाती, तो दाऊद इब्राहिम गिरोह को मुंबई अंडरवर्ल्ड में फिर से बड़ी बढ़त मिल जाती। हफ्ता वसूली और अपराध के बाजार पर उसका नियंत्रण और मजबूत हो जाता। यह पूरा घटनाक्रम इस बात का प्रमाण था कि उस दौर में अंडरवर्ल्ड, अंतर्राष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों और मादक पदार्थों के कारोबार के बीच गहरे और खतरनाक संबंध बन चुके थे, जिसने मुंबई की कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी।

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