सामना संवाददाता / मुंबई
गरीबों पर दोहरी मार की स्थिति इसलिए और भी गंभीर हो गई, जब मिट्टी के तेल वितरण की टूटी कड़ी के कारण आपूर्ति अटकने से पूरा सप्लाई सिस्टम बेपटरी हो गया। बीच में बंदी के चलते बिखरी सप्लाई चेन ने हालात ऐसे बना दिए हैं कि अब उसे दोबारा खड़ा करना महायुति सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। खाद्य व आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल की स्वीकारोक्ति ने भी सिस्टम की खामियों को उजागर कर दिया है।
वैश्विक र्इंधन संकट के बीच राज्य में केरोसीन वितरण को लेकर महायुति सरकार एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। एक तरफ सरकार गरीबों के घरों में चूल्हा जलते रखने का दावा कर रही है तो दूसरी तरफ जमीनी हकीकत में वितरण व्यवस्था की खामियां खुलकर सामने आ रही हैं। खाद्य व आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने केरोसीन वितरण जारी रखने का एलान जरूर किया है, लेकिन साथ ही यह भी स्वीकार किया है कि सिस्टम में गंभीर अड़चनें मौजूद हैं। कल अहिल्यानगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मंत्री भुजबल ने कहा कि युद्ध जनित वैश्विक परिस्थितियों के कारण र्इंधन की समस्या बढ़ी है। हालांकि, महाराष्ट्र की स्थिति अन्य देशों जितनी गंभीर नहीं है। उन्होंने बताया कि राज्य को फिलहाल ३.५ हजार किलोलीटर केरोसीन का कोटा मिल रहा है। इसके बावजूद यह सवाल बना हुआ है कि जब कोटा उपलब्ध है, तो फिर आम लोगों तक केरोसिन समय पर क्यों नहीं पहुंच पा रहा।
१०० वितरक तैयार
सरकार का दावा है कि अब तक करीब १०० बड़े वितरक फिर से इस व्यवस्था में जुड़ने के लिए तैयार हो गए हैं। पुराने लाइसेंसों का नवीनीकरण किया जा रहा है और जिन लोगों ने आवेदन किया है, उन्हें मंजूरी मानकर तुरंत वितरण शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
