मुख्यपृष्ठसमाचारवसूली फेल तो तोड़-फोड़ का खेल... व्यापारियों के आरोपों से अधिकारी बना बुत

वसूली फेल तो तोड़-फोड़ का खेल… व्यापारियों के आरोपों से अधिकारी बना बुत

राजेश सरकार / प्रयागराज

उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के दावों के बीच जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। झूंसी पावर हाउस के सामने उस समय माहौल विस्फोटक हो गया, जब उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद की टीम अवैध निर्माण ढहाने के लिए बुलडोजर लेकर पहुंची। कार्रवाई शुरू होने से पहले ही स्थानीय लोगों ने टीम को घेर लिया और मौके पर मौजूद अधिकारी पर 50,000 रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप जड़ दिया। लोगों का आरोप था कि रिश्वत नहीं दी, तो बुलडोजर लेकर तोड़फोड़ करने पहुंच गए। जबकि संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन बताया जा रहा है। इस आरोप ने पूरे घटनाक्रम को महज अतिक्रमण हटाओ अभियान से हटाकर भ्रष्टाचार बनाम आमजन की लड़ाई में बदल दिया। स्थिति तब और भयावह हो गई, जब एक व्यापारी ने कथित तौर पर खुद को आग लगाने की धमकी दे दी। इस चेतावनी से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और मौजूद पुलिस बल के हाथ-पांव फूल गए। उग्र भीड़ के सामने हालात संभालना मुश्किल होता दिखा। पुलिसकर्मी लगातार समझाने-बुझाने में जुटे रहे, मगर लोगों का आक्रोश थमता नजर नहीं आया। घटना के दौरान अधिवक्ताओं का एक समूह भी मौके पर पहुंच गया और समर्थन में खड़ा हो गया। उन्होंने कार्रवाई की वैधता और समय पर भी सवाल उठाए, जिससे माहौल और गरमा गया। सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि आरोपों के घेरे में आए अधिकारी मौके पर मौजूद रहे, लेकिन स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए। भीड़ के सवालों और आरोपों के बीच उनकी चुप्पी ने संदेह को और गहरा कर दिया। यह घटना प्रदेश में बढ़ते भ्रष्टाचार और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जब कानून के नाम पर कार्रवाई करने वाली एजेंसियों पर ही वसूली के आरोप लगें, तो आम जनता का भरोसा किस पर टिके? देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाता है या फिर यह मामला भी आरोप-प्रत्यारोप के शोर में दबकर रह जाएगा।

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