आज की खबर पढ़कर मन सचमुच भारी हो गया। पंजाब के फरीदकोट से आई यह घटना किसी को भी झकझोर देने के लिए काफी है। यहां वर्दी वाली दादी का खौफनाक चेहरा देखने को मिला। एक महिला एएसआई द्वारा अपनी ही ५ साल की पोती को धूप में बांध देना, यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि हमारे समाज के भीतर छिपी संवेदनहीनता का आईना है। सोचने वाली बात है कि जो लोग कानून और सुरक्षा के प्रतीक माने जाते हैं, अगर वही इस तरह का व्यवहार करें तो आम इंसान किस पर भरोसा करे? एक मासूम बच्ची, जिसे सुरक्षा, प्यार और देखभाल मिलनी चाहिए, उसे इस तरह की सजा देना, यह समझ से परे है। लेकिन इस घटना से यह सवाल उठ खड़ा होता है कि क्या यह सिर्फ गुस्से का मामला था या इसके पीछे कोई गहरी मानसिक या पारिवारिक समस्या है? क्या हमारे समाज में बच्चों के साथ व्यवहार को लेकर जागरूकता की कमी है? और सबसे बड़ा सवाल, क्या हम ऐसे मामलों को सिर्फ खबर मानकर भूल जाएं? यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि अनुशासन और क्रूरता के बीच की रेखा कहीं धुंधली तो नहीं हो गई है। बच्चों को सिखाने के नाम पर अगर हम उनकी मासूमियत ही छीन लें, तो फिर बचता क्या है? – भावना सिंह
