शीतल अवस्थी
श्रीगणेश का मस्तक भगवान शिव ने कहा था, ये कथा तो हम सभी जानते हैं। लेकिन ब्रह्मवैवर्त पुराण में इसके अलग एक कथा और भी है, जिसके अनुसार शनिदेव के देखने पर श्रीगणेश का मस्तक कटा था, ये बताया गया है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार श्रीगणेश के जन्म पर सभी देवता उन्हें आशीर्वाद देने पहुंचे। जब सभी देवता श्रीगणेश को आशीर्वाद दे रहे थे, तब शनिदेव सिर नीचे किए हुए खड़े थे। पार्वती द्वारा पूछने पर शनिदेव ने कहा कि मेरे द्वारा देखने पर आपके पुत्र का अहित हो सकता है, लेकिन जब माता पार्वती के कहने पर शनिदेव ने बालक को देखा तो उसका सिर धड़ से अलग हो गया। तब भगवान विष्णु गरूड़ पर सवार होकर उत्तर दिशा में ओर गए और पुष्पभद्रा नदी के त: पर हथिनी के साथ सो रहे एक गजबालक (हाथी का बच्चा) का सिर का:कर ले आए। उस गजबालक का सिर श्रीहरि ने माता पार्वती के मस्तक विहीन पुत्र के धड़ पर रखकर उसे पुनर्जीवित कर दिया।
