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मारना नहीं चाहता था…हो गया!..आईआरएस अधिकारी की बेटी के कातिल ने स्वीकारा जुर्म

– आरोपी को जुर्म का कोई पछतावा नहीं

– दीदी के चिल्लाने पर किया लैंप से वार

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

दिल्ली में आईआरएस अधिकारी की बेटी की निर्मम हत्या के मामले में जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने पुलिस को भी हैरान कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, आरोपी राहुल मीणा ने गिरफ्तारी के बाद असामान्य रूप से शांत व्यवहार दिखाया और पूछताछ में उसके चेहरे पर किसी तरह का पछतावा नजर नहीं आया। पूछताछ में उसने बताया कि वह लड़की को मारना नहीं चाहता था, बस हो गया।
मीणा ने बताया कि वह पैसे और गहने चुराने के इरादे से घर में दाखिल हुआ था। इसी दौरान पीड़िता ने शोर मचाया और उसे रोकने की कोशिश की। आरोपी के अनुसार, ‘दीदी चिल्लाने लगीं तो मैंने लैंप से वार किया, जिससे वो बेहोश हो गर्इं।’ इसके बाद उसने बार‑बार यही कहा कि ‘वह मारना नहीं चाहता था और यह सब यूं ही हो गया।’ आरोपी ने यह भी कहा कि अगर उस समय पैसा मिल गया होता तो यह वारदात नहीं होती।
आंटी ने बुलाया था
जिस आईआरएस अधिकारी के परिवार ने उसके साथ अच्छा व्यवहार किया, उसे २० हजार रुपए सैलरी के अलावा बोनस भी दिया, उनकी बेटी के साथ ऐसी दरिंदगी कर उसने हाउस हेल्प पर से विश्वास ही हिला दिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी ने पूछताछ में बताया कि अधिकारी की पत्नी को वह आंटी कहता था। घर में घुसने के लिए उसने उनके नाम का ही इस्तेमाल किया। उसने कहा कि आंटी ने पैसे देने के लिए बुलाया था।
डिजिटल सबूतों की जांच
आरोपी को साकेत कोर्ट ने चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है। पुलिस पूरे घटनाक्रम को एक बार फिर समझने की कोशिश कर रही है। इसके लिए फोरेंसिक और डिजिटल सबूतों को खंगाला जा रहा है, ताकि अपराध के पीछे क्या मकसद था, इसका पता लगाया जा सके।
फर्श पर हर जगह बिखरा था खून!
दिल्ली के पॉश इलाके में एक आईआरएस अधिकारी की बेटी के साथ रेप व उसकी निर्मम हत्या ने शहर को हिला दिया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि हत्या के बाद घर के भीतर फर्श पर हर जगह खून के धब्बे थे, जिससे वारदात की क्रूरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके बावजूद आरोपी बेहद सामान्य अंदाज में बिल्डिंग से बाहर निकल गया। जांच में सामने आया है कि सब कुछ सामान्य दिखाने के लिए उसने अपना मोबाइल स्विच ऑफ किया और फोन पर बात करने का नाटक करता हुआ बाहर चला गया।
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी का रवैया बेहद लापरवाह रहा। सामान्य तौर पर जघन्य अपराध के बाद आरोपी में घबराहट, बेचैनी या पश्चाताप दिखता है, लेकिन इस मामले में आरोपी ने कहा, ‘चोरी करने का अफसोस नहीं है, पर मारना नहीं चाहिए था, हो गया।’ पुलिस ने जब उससे पूछा कि क्या उसे अपने किए का डर नहीं है, तो उसने जवाब दिया, ‘मैं पैसे लेने के इरादे से आया था, मुझे किसी भी हाल में पैसे चाहिए थे।’
पकड़े जाने का अंदेशा था
आरोपी ने यह भी कबूल किया कि वह मृतका के परिवार के साथ ७–८ महीनों से काम कर रहा था। जब उससे पूछा गया कि क्या उसे उनके लिए बुरा नहीं लगा, तो उसने कहा, ‘वो लोग मेरे लिए भगवान जैसे थे, बहुत अच्छे थे, लेकिन मुझे पैसे चाहिए थे।’ आरोपी को पहले से अंदेशा था कि चोरी के बाद वह पकड़ा जाएगा, लेकिन उसने यह सोचकर वारदात की कि कम से कम पैसे उसके परिवार तक पहुंच जाएंगे।

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