-सबसे बड़ी टेक कंपनी ‘चेग’ बंद होने के कगार पर
-५० फीसदी कर्मचारियों को काम से निकाला गया
सामना संवाददाता / मुंबई
अमेरिका में कुछ साल पहले तक अगर किसी स्टूडेंट को पढ़ाई में मदद चाहिए होती थी, तो सबसे पहला नाम आता था ‘चेग’। अमेरिका की यह कंपनी ऑनलाइन एजुकेशन में एक बड़ा नाम थी। चेग एक टाइम पर अमेरिका की सबसे बड़ी एडटेक कंपनी थी, लेकिन चार साल में ऐसा हुआ कि अब ये दिवालिया होने के कगार पर है। होमवर्क सॉल्व करना हो, सवालों के जवाब चाहिए हों या टेस्ट की तैयारी करनी हो, लाखों स्टूडेंट इसके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते थे, लेकिन फिर आया ‘एआई’, खासकर चैटजीपीटी, जिसने पूरे गेम को बदल दिया।
२०२१ के आसपास चेग अपनी ऊंचाई पर थी। कंपनी की वैल्यू करीब १६ अरब डॉलर तक पहुंच गई थी, लेकिन इसके बाद जो गिरावट शुरू हुई, वो इतनी तेज थी कि कुछ ही सालों में कंपनी की वैल्यू लगभग खत्म होने के कगार पर पहुंच गई। असल में चेग का पूरा बिजनेस मॉडल इस बात पर टिका था कि स्टूडेंट पैसे देकर सवालों के जवाब लें। यानी अगर आपको किसी सवाल का जवाब चाहिए तो आपको सब्सक्रिप्शन लेना पड़ता था, लेकिन २०२२ में जब चैटजीपीटी आया, तो पहली बार स्टूडेंट्स के पास ऐसा टूल आ गया जो वही काम प्रâी में, तुरंत और काफी हद तक सही तरीके से करने लगा।
घटने लगे यूजर्स
धीरे-धीरे इसका असर दिखने लगा। कंपनी के यूजर्स कम होने लगे, वेबसाइट पर ट्रैफिक गिरने लगा और सबसे बड़ा झटका लगा सब्सक्राइबर बेस को। रिपोर्ट्स बताती हैं कि एआई टूल्स के आने के बाद चेग के यूजर्स और रेवेन्यू दोनों तेजी से गिरने लगे। चेग खुद भी मान चुका है कि चैटजीपीटी और दूसरे एआई टूल्स ने उसके बिजनेस को सीधा नुकसान पहुंचाया है। यहां तक कि कंपनी के शेयर एक समय में ५० फीसदी तक गिर गए।
