-अशोक खरात २६ अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में दैवीय शक्ति के नाम पर शोषण के आरोप
सुनील ओसवाल / नाशिक
अशोक खरात मामले की सुनवाई शुक्रवार को अदालत में तीखी बहस और सवालों के बीच हुई, जहां बचाव पक्ष और जांच एजेंसी आमने-सामने नजर आए। धार्मिक आस्था की आड़ में महिलाओं के कथित शोषण के आरोपों से घिरे खरात को अदालत ने २६ अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। अदालत ने साफ किया कि मामले की गंभीरता और कई पीड़िताओं के सामने आने के कारण जांच अधूरी नहीं छोड़ी जा सकती। वीडियो कॉन्प्रâेंसिंग के जरिए हुई सुनवाई में सबसे ज्यादा चर्चा उस पैटर्न को लेकर रही, जिसमें पीड़िताओं को कथित तौर पर पानी, पेड़े और अन्य खाद्य पदार्थ देकर बेहोश किए जाने का आरोप है। जांच एजेंसी का दावा है कि इसी तरीके से कई महिलाओं को निशाना बनाया गया। सरकारी वकील ने दलील दी कि आरोपी न केवल महिलाओं को ‘दैवीय शक्तियों’ का भय दिखाता था, बल्कि उनके परिवारों पर अनहोनी का डर पैदा कर मानसिक रूप से नियंत्रण स्थापित करता था। अभियोजन ने अदालत को बताया कि यह मामला एक से अधिक घटनाओं से जुड़ा है और हर केस में अलग पीड़िता होने के कारण विस्तृत जांच जरूरी है। बचाव पक्ष ने इस दलील पर कड़ा ऐतराज जताया। अशोक खरात के वकील ने तीखे शब्दों में कहा, ‘हर बार वही कहानी-पानी और पेड़े। क्या जांच एजेंसी के पास कोई ठोस नया आधार नहीं है?’ उन्होंने एसआईटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आरोपों की पुनरावृत्ति को ही आधार बनाकर आरोपी को लगातार हिरासत में रखा जा रहा है।
इस पर जांच अधिकारियों ने जवाब दिया कि समान तरीका होने का मतलब यह नहीं कि मामले एक ही हैं। प्रत्येक शिकायत अलग है और हर पीड़िता के बयान, परिस्थितियां और साक्ष्य स्वतंत्र रूप से जांच के दायरे में आते हैं। अधिकारियों ने कहा कि आरोपी से पूछताछ के बिना कई महत्वपूर्ण कड़ियां सामने नहीं आ पाएंगी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर हैं और जांच को बाधित नहीं किया जा सकता।
