मुख्यपृष्ठस्तंभवाचाल विधायक के तांडव के आगे शरणागत हुई प्रदेश सरकार

वाचाल विधायक के तांडव के आगे शरणागत हुई प्रदेश सरकार

प्रमोद भार्गव

ऐसा अपवाद स्वरूप ही देखने में आता है कि मध्यप्रदेश में सत्तापक्ष से जुड़े भाजपा विधायक और उनके पुत्र की वाचाल उद्दंडता एक जैसी हो। शिवपुरी जिले के पिछोर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक है प्रीतम लोधी। प्रीतम बिगड़े बोलों की राजनीति और लंबी आपराधिक सूची के अग्रिम पंक्ति के नेता है। उनके बेटे दिनेश लोधी द्वारा करैरा में अपनी थार कार से दो बाइक सवारों और दो महिला राहगीरों को जान-बूझकर टक्कर तो मारी ही, कारण पूछने पर उद्दंडता भी दिखाई। इस दुर्घटना में पांच लोग घायल हुए हैं। करैरा के आईपीएस एसडीओपी आयुश जाखड़ ने हादसे को लेकर दिनेश से पूछताछ की तो उन्होंने बिना किसी षर्म-लिहाज के कहा कि ‘मैंने तो होर्न बजाया, लेकिन ये बाइक लहराते चले जा रहे थे, इसलिए टक्कर मार दी।‘ आखिरकार पुलिस ने गाड़ी से काली फिल्म व हूटर हटवाकर चालान काटने और दुर्घटना की कार्यवाही सामान्य धाराओं में कर दी। इसके बाद पूछताछ व कार्यवाही की विडियोग्राफी पर सवाल उठने लगे, तब विधायक प्रीतम लोधी भी बेटे के पक्ष में आकर आयुश जाखड़ द्वारा की गई कार्यवाही के खिलाफ इतनी अनर्गल षब्दावली में बोले कि आईएएस-आईपीएस अधिकारी एसोशिएशन को आपत्ति दर्ज करानी पड़ गई।
प्रीतम ने बाकायदा विडियो जारी कर न केवल आयुश जाखड़ को बल्कि समूचे प्रकाशन को ही फटकारते हुए आईना दिखा दिया कि एक विधायक के आगे आप लोग कुछ भी नहीं है। जारी विडियो में विधायक कह रहे है कि एक्सीडेंट हुआ तो उन्होंने खुद एसपी से बेटे के खिलाफ मुकादमा दर्ज करने के लिए कह दिया था। गाड़ी और बेटे को थाने में भिजवाकर जमानत भी करा ली थी। पूछताछ के लिए भी बेटे को थाने में भेजा। बावजूद इस हादसे का कांग्रेसीकरण कर ऐसे प्रस्तुत किया जा रहा है, जैसे कोई आतंकवादी घटना घट गई हो। एक आदिवासी महिला को ट्रक ने कुचल दिया था, क्या एसडीओपी ने वहां मौके पर पहुंचकर मुआयना किया ? नहीं, क्योंकि वहां से पैसा नहीं मिलना था। वहां जाते हो, जहां से पैसा मिलता है। ऐसे अधिकारी को कहना चाहता हूं कि अपनी औकात और कानून के दायरे में रहे। कानून हमें भी आता है और कानून हम भी जानते है। इससे भी आगे खुली चुनौती देते हुए कहा कि ‘वो (बेटा) करैरा आएगा भी और चुनाव भी लड़ेगा, अगर तेरे डेडी में दम है तो रोक लेना। मेरा इतिहास पता कर ले। 15 दिन में एसडीओपी स्पश्टीकरण नहीं देते है तो पांच से दस हजार लोगों को लेकर उनके बंगले का घेराव करेंगे और उसे गोबर से भर देंगे। मेरा मुक्का पहले ढाई किलो का था, अब ढाई सौ किलो का हो गया है। एसडीओपी को चैन से नहीं बैठने दूंगा। दरअसल पुलिस ने बेटे से कह दिया था कि यहां दिख मत जाना और करैरा से चुनाव मत लड़ना, जैसी बातों का विधायक ने यह जबाव दिया था। प्रीतम लोधी के चुनावी षपथ-पत्र में 8 मामले दर्ज होने का उल्लेख किया है। इनमें तीन ग्वालियर में, दो खनियाधाने में एक भौंती, करैरा, पिछोर और रन्नौद में एक-एक मामले दर्ज होना बताया है। इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, भड़काऊ भाशण और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसे गंभीर मामले दर्ज है। हालांकि उनसे जुड़े 35 मामलों की सूची सोशल मीडिया पर उजागार है। उनका एक बार जिलाबदर भी हो चुका है।
भाजपा भले ही अपनी पहचान षुचिता, अनुशासन और सुशासन से करती रही हो, लेकिन पार्टी में अब अटल और आडवाणी जैसी गरिमा दिखाई नहीं देती। प्रीतम जैसे कई नेता मर्यादित शब्दावली की सीमा का अनेक बार उल्लंघन कर चुके हैं। अपनी जाति के पूर्वाग्रह भी सार्वजनिक रूप से जता चुके हैं। शिवपुरी जिले के खरह ग्राम में संपन्न एक जातीय सभा में अपने सजातीय लोगों को संबोधित करते हुए ब्राह्मण समुदाय के बारे में अत्यंत अनर्गल प्रलाप किया था। इस विवादित बयान का वीडियो भाषण देने के अगले दिन ही तेजी से वायरल हो गया था। इसमें पिछोर विधानसभा सीट से दो बार भाजपा के प्रत्याशी रह चुके लोधी कह रहे हैं, ‘कथावाचक पंडित आपको पागल बनाते हैं। ये दान-दक्षिणा लेकर रफूचक्कर हो जाते हैं, ये कथावाचक कम उम्र की महिलाओं को आगे बिठाते हैं इनकी नजर कहीं ओर होती है। इस तरह ये नवरात्रि के नौ दिन रोजाना आपको सात-आठ घंटे तक बौराते रहते हैं। कहते है कि अगर तुम दान करोगे तो भगवान तुम्हें धन-धान से भरा पूरा रखेगा। मासूम महिलाएं इनकी बातों में आ जाती हैं और दूध, घी, दही अपने बच्चों को खिलाने की बजाय इन्हें दे देती हैं। ये ब्राह्मण नौ दिन तक आपको उल्लू बनाने और ऊल-जलूल बातें करने के 25 से 50 हजार रुपए तक व्यर्थ में वसूल कर ले जाते हैं। ये पंडित 20 से 30 साल की महिलाओं को आगे बैठाकर उन्हें नचवाते हैं और खुद ऊपर बैठकर आनंद लेते हैं।‘ उमा भारती के खास रहे प्रीतम ने यह भाषण 17 अगस्त को वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी की 191 वीं जयंती पर दिया था। प्रीतम ब्राह्मणों पर तो खूब लांक्षण लगाते रहे, लेकिन अवंतीबाई के पराक्रम पर कुछ भी नहीं बोले थे।
लोधी भाजपा के कद्दावर नेता होने के साथ बाहुबली नेता हैं। वे ग्वालियर जिले के ग्राम जलालपुर से सरपंच भी रह चुके है। देखते-देखते इस वीडियो का युवा ब्राह्मणों पर इतना असरकारी रहा कि इस बयान से आक्रोशित सर्व ब्राह्मण समाज रन्नौद के युवा मोर्चा मंडल के अध्यक्ष प्रवीण मिश्रा ने रन्नोद थाने में एफआईआर दर्ज करा दी थी। इसके साथ ही समूचे ग्वालियर चंबल-अंचल में अनेक स्थानों पर ब्राह्मण संगठन मुखर विरोध करते हुए सामने आ गए थे। पुलिस अधीक्षकों को ज्ञापन दिए और प्रीतम के पुतले भी जलाए। करणी सेना ने भी प्रीतम के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की भी मांग कर दी थी।
दो दिन के भीतर यह आंदोलन प्रदेशव्यापी हो गया और प्रीतम को अविलंब भारतीय जनता पार्टी से बाहर करने की मांग उठ गई। ब्राह्मणों की इस नाराजी को लेकर प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार चिंतित हो उठी थी। क्योंकि 2018 के विधानसभा चुनाव में ब्राह्मणों की नाराजी के चलते ही भाजपा को स्पश्ट बहुमत से वंचित होना पड़ा था और कांग्रेस की कमलनाथ सरकार सत्तारूढ़ हो गई थी। बाद में ज्योतिरादित्य सिंधिया की कांग्रेस से बगावत के चलते भाजपा ने सत्ता की कुर्सी फिर से थामी। आखिरकार इस विवाद का पटाक्षेप करने की दृश्टि से मुख्यमंत्री व अन्य प्रभावशाली नेताओं की सलह पर प्रीतम लोधी द्वारा क्षमा मांग लेने के बावजूद छह साल के निश्कासन का दंड दे दिया था। लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्हें न केवल पार्टी में ससम्मान वापस ले लिया गया, बल्कि पिछोर विधानसभा से टिकट भी दे दिया। अततः ब्राह्मणों की नाराजगी के बावजूद प्रीतम भारी बहुमत से चुनाव जीत गए थे।
इस ताजा घटनाक्रम के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रीतम को आचरण अनुशासन के अनुरूप नहीं होने का नोटिस देकर उत्तर मांगा। आचरण को अत्यंत आपत्तिजनक भी माना। क्योंकि प्रीतम ने प्रशिक्षु आईपीएस आयुश जाखड़ को खुलेआम धमकी देते हुए आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। प्रीतम भोपाल पहुंचे और अध्यक्ष व मुख्यमंत्री मोहन यादव की समझाइश पर, ‘मेरी षब्दावली गलत थी, मैं खेद जताता हूं, आगे पार्टी की गाइडलाइन पर चलूंगा।‘ इस दो लाइन की क्षमा याचना के आगे समूची प्रदेश सरकार एक वाचाल और उद्दंड विधायक के आगे शरणागत हो गई।

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