कई बार टूटा है आदमी
टूट कर जुड़ा है आदमी
फिर टूटा, जुड़ा है आदमी
अरे! ये आदमी है,
कोई खिलौना तो नहीं कि
बार बार टूटता-जुड़ता रहे
आदमी, अब सवाल नहीं करता,
किसने तोड़ा?…क्यों तोड़ा?
क्योंकि आदमी के पास
इन सवालों का जवाब है
जवाब सुनिए जनाब
“आदमी बना ही है
अधिकतर टूटने…और कभी-कभार जुड़ने।”
अतः आदमी को आदमी से
तोड़ने वालो, हो सके तो
आदमी को आदमी से जोड़ों
क्या कहा?..नहीं जोड़ सकते!
तो कम से कम और तो ना तोड़ो।
-त्रिलोचन सिंह अरोरा
