पितृपक्ष के अंतिम दिन
पूज लिए जाते सभी पूर्वज तब
मां के नवरात्रों की जग जाती आस
महाल्या के दिन पुज जाते सभी पितृ
मिल जाता सबका आशीर्वाद।
अब होगी नौ दिन मां की पूजा
मां के दिखते नौ विभिन्न रूप
प्रत्येक रूप है मां का अनूठा अनूप।
शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा,
कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी
कालरात्रि, महागौरी, सिद्धीदात्री।
मां तू शक्ति और भक्ति है
श्रद्धा है, करुणा है जग रूपा है
नित बदलते तेरे वाहन
नित होता असुरों का संहार।
अपने भक्तों को शांति, निडरता देती
और करती सबका उद्धार
संकट टारति, विघ्न हरती सुख,
समृद्धि सिद्धियों की वर्षा करती
भक्तों के मन की आशाएं पूरती
मां तेरा है हृदय विशाल।
भक्त सजाते आरती थाल,
फल, फूल, मौली, धूप, कपूर
चंदन, पान, सुपारी, नारियल
जलाते घृत का दीपक
औढ़ा देते तुझको चुनरी लाल।
नवरात्र महा पर्व से लगते
सुख आंनद देते हृदय में भरते महा उल्लास।
-बेला विरदी
