मिडिल क्लास

इक सूखी सब्जी और दो रोटी उसके साथ
है यही टिफिन उसका जो कहलाता मिडिल क्लास
दो तरह के चावल घर आते हैं इक रोजमर्रा के लिए
और दूजा बनता जब हो मौका कुछ खास
बच्चों की फरमाइश पर आपका होता एक ही जवाब
बेटा जरूर खरीदेगे बस कुछ महीने के बाद
घर के कपड़े और बाहर के कपड़े
दोनों के होते अलग अलग विभाग
चप्पल की जोड़ी भी दूसरी तभी थी आती
पहली जब मांग ले अपनी मर्जी से अवकाश
पनीर की सब्जी घर में तभी बनाती अम्मा
जब दूघ में आ जाए खटास
छुट्टी में जब बात हो कही घूम के आने की
नाना के घर जाना यही एक मात्र मम्मी का जवाब
जन्मदिन पर कुछ अच्छा खा कर मंदिर जाना
नया कपड़ा पहले भगवान को चढ़ाना हर घर में था यही रिवाज
मां-बाप से मिलती बच्चों को मेहनत की शिक्षा
और गुरुजन से मिलती ज्ञान की भिक्षा
सस्ती गाजर मिले तो बनता हलवा
हर सब्जी में होता आलू का जलवा
बच्चों को बड़ा करते करते बूढ़े हो जाते मां-बाप
यही कहानी है घर घर की कहलाते है जो मिडिल क्लास।
-प्रज्ञा पाण्डेय मनु

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