जब तेरी याद आती है
स्निग्ध मधुरता जगती है
लगता है पूरी वादी में
तेरी ही महक छा जाती है
यही महक मुझे सपने में जगा देती है
लगता है मन में एक कोमल
कली खिलने वाली है
मन हिलोरें लेता है और
बिन छुए मन के भीतर
मधुर संगीत भर जाता है
शान्त वातावरण में मन के
तार झंकृत हो जाते हैं।
जब तेरी याद आती है ।
स्मरण हो जाता है
प्रीत के धागों की हमने
मिल कितनी गांठें खोली हैं
तुम मुझे उमड़ते बादल से लगते हो
तो मैं चांद बन जाती हूं
झरती चांदनी में कितने ही
फूल खिला जाती हूं
रातरानी रजनीगंधा मोगरा चमेली
नन्हा नाज़ुक सा पारिजात झर जाता है
लगता है हमारे स्वागत में
धवल पुष्पों का पांवड़ा बिछ जाता है।
जब जब तेरी याद आती है।
प्रेम सलिला राह खोजती चलती है
प्रीत का झरना बह निकलता है
मिलन के पलों का अहसास
मधुमास सा मन हरता है
जब भी तेरी याद आती है
अपने को सहला कर परखती हूं
बीते पलों की मधुर
यादों में खो जाती हूं।
-बेला विरदी
