सामना संवाददाता / मुंबई
इस बजट में विकास का सिर्फ मृगजाल दिखाया गया है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में आम लोगों के हाथ में कुछ भी आने वाला नहीं है। यह जनता के साथ सीधे-सीधे धोखा है। कल पेश हुए राज्य के बजट पर शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने इन दो टूक शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया दी।
उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि बजट में ठोस योजनाएं केवल ठेकेदारों के लिए बनाई गई हैं, जबकि आम जनता को सिर्फ झूठे वादों से बरगलाने की कोशिश की गई है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह बजट किसानों, मजदूरों और महिलाओं के साथ सीधा धोखा है। यह बजट विकास का भ्रम पैदा करने वाला है और इससे आम लोगों की जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आने वाला। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब है और ऐसे में यह कर्ज लेकर जश्न मनाने जैसा बजट है, जिससे राज्य का कोई भला नहीं होगा। सरकार ने ‘लाडली बहन’ के साथ धोखा किया है। योजना के तहत २,१०० रुपए देने का वादा किया था, लेकिन बजट में उसका कहीं भी जिक्र नहीं है। बजट में झूठे वादों की भरमार है और आश्वासन का उन्नत महामार्ग तैयार किया गया है।
हमने बिना शर्त कर्जमाफी दी, ये क्यों नहीं दे सकते?
किसानों को सीधे कर्जमाफी दी जानी चाहिए। उनके साथ पात्र- अपात्र जैसी शर्तों का खेल बंद करना चाहिए। बजट में बार-बार २०४७ का जिक्र किया गया है। क्या सरकार किसानों की कर्जमाफी भी २०४७ में ही करने वाली है? उन्होंने याद दिलाया कि उनकी सरकार ने पांच साल पहले समयबद्ध तरीके से किसानों की कर्जमाफी की थी। उस समय पात्र-अपात्र या अन्य शर्तों का कोई जंजाल नहीं रखा गया था। सभी किसानों को लाभ दिया। कोरोना महामारी आने के कारण प्रोत्साहन राशि नहीं दी जा सकी थी। जब उसे देने की प्रक्रिया शुरू हुई, तभी उनकी सरकार गिरा दी गई।
