मुख्यपृष्ठनए समाचारनगर रचना विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ ... मीरा-भायंदर में अनशन!

नगर रचना विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ … मीरा-भायंदर में अनशन!

सुरेश गोलानी / भायंदर
(एमबीएमसी) के नगर रचना विभाग में फैला भ्रष्टाचार और बिल्डरों के साथ सांठगांठ के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता रणजीत झा का अनशन दूसरे दिन और भी आक्रामक हो गया है। ज्ञात हो कि नगर रचना विभाग और बिल्डरों के बीच गठबंधन के पुख्ता संकेत और प्रमाण देने के बावजूद मनपा द्वारा किसी प्रकार की प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने के चलते रणजीत झा ने अनशन के रूप में प्रशासन के खिलाफ जंग छेड़ दी है।
ज्ञात हो कि मनपा के नगर रचना विभाग ने कागजी कार्रवाई करते हुए १३ मार्च २०२५ को ओस्तवाल बिल्डर को `स्टॉप वर्क’ नोटिस जारी किया था। हालांकि `स्टॉप वर्क’ नोटिस को `लॉलीपॉप’ और गुमराह करने वाला आदेश बताते हुए झा ने अब वैâबिनेट मंत्री और सत्ताधारी दल के विधायक से इस पूरे मामले में विशेष जांच दल गठित कर निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की है। मनपा द्वारा `स्टॉप वर्क’ नोटिस जारी करने से यह तो साबित हो गया है कि निर्माण नियमों का गंभीर उल्लंघन हुआ है, लेकिन रणजीत झा ने सवाल उठाया कि इस धांधली को संरक्षण देने वाले अधिकारियों को बचाने के पीछे क्या राज है, यह लोगों के सामने आना जरूरी है। दोपहर का सामना से बात करते हुए झा ने कहा कि मनपा ने स्टॉप वर्क ऑर्डर देकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की है, लेकिन वे यह भूल गए कि मुद्दा अब बहुत बड़ा हो चुका है।
मेरा लक्ष्य काम रुकवाना नहीं, अधिकारियों को जेल भिजवाना
झा ने कहा कि मेरा लक्ष्य केवल एक काम रुकवाना नहीं, बल्कि उन अधिकारियों को जेल भिजवाना है जो बिल्डरों के साथ मिलकर न सिर्फ जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं, बल्कि शहर के उचित नियोजन को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं। गौरतलब है कि आंदोलन को कुचलने की कोशिश के बावजूद अनशन स्थल पर समर्थकों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन बैकफुट पर है। शहर के जागरूक नागरिक और विभिन्न संगठन अब इस भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम से जुड़ रहे हैं, जिससे नगर निगम और स्थानीय राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है।
विशेष जांच दल गठित करने के अलावा आंदोलनकारियों द्वारा की गई अन्य मांगें:
-जवाबदेही तय हो: जो अधिकारी नियमों के विरुद्ध बिल्डरों को लाभ पहुंचा रहे थे, उनकी संपत्ति की जांच हो और उन्हें तत्काल सेवामुक्त किया जाए।
-तबादला नीति का पालन: १५-१५ सालों से एक ही मलाईदार पद पर जमे अधिकारियों को विभाग से बाहर निकाला जाए।

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