धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
महाराष्ट्र में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार चाहे जितने दावे करे, लेकिन हकीकत बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही है। राज्य की आर्थिक रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन वर्षों में महिलाओं पर अत्याचार के १.४ लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं। केवल वर्ष २०२५ में ही ५० हजार से अधिक अपराध दर्ज होना इस बात का संकेत है कि हालात कितने गंभीर हैं। अपहरण, यौन अत्याचार और घरेलू हिंसा जैसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी ने महिला सुरक्षा के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। खुद सरकारी रिपोर्ट में सामने आए ये आंकड़े बता रहे हैं कि ‘लाडली बहनों’ की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावों और जमीनी सच्चाई के बीच गहरी खाई मौजूद है।
महाराष्ट्र में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर महायुति सरकार भले ही बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन राज्य की आर्थिक रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े इन दावों की हकीकत उजागर कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन वर्षों में महिलाओं के खिलाफ अपराध के १.४ लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जो राज्य की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष २०२३ में महिलाओं पर अत्याचार के ४६,०७२ मामले दर्ज हुए थे। इसके बाद २०२४ में यह संख्या बढ़कर ४६,३३० हो गई और वर्ष २०२५ में यह आंकड़ा ५०,३५० तक पहुंच गया। यानी केवल एक साल में ही हजारों नए मामले सामने आए हैं। अपराध की श्रेणियों पर नजर डालें तो स्थिति और चिंताजनक दिखाई देती है। वर्ष २०२३ में बलात्कार के ७,५४८ मामले दर्ज हुए थे, जो २०२४ में बढ़कर ७,९६० हो गए। हालांकि, २०२५ में यह संख्या ६,६८३ दर्ज की गई।
अपहरण के मामले बढ़े
वर्ष २०२३ में अपहरण के ९,३६९ मामले दर्ज हुए। वर्ष २०२४ में यह संख्या घटकर ८,६८३ रही। लेकिन २०२५ में फिर तेज बढ़ोतरी के साथ १०,५४४ मामले दर्ज किए गए, जो तीन वर्षों में सबसे अधिक हैं।
यौन उत्पीड़न भी हुआ अनकंट्रोल
यौन उत्पीड़न के मामलों में भी बड़ी संख्या सामने आई है। वर्ष २०२३ में १७,३२८ मामले दर्ज हुए, २०२४ में १६,९७१ और २०२५ में यह संख्या बढ़कर १८,७८४ हो गई। इसके अलावा अनैतिक व्यापार के मामले २०२३ में २२२, २०२४ में १५८ और २०२५ में बढ़कर २९७ हो गए। वहीं अन्य अपराधों के मामले २०२३ में ३,२०९, वर्ष २०२४ में ३,४८९ और २०२५ में २,२०४ दर्ज किए गए।
अत्याचार के मामले भी बढ़े
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष २०२३ में महिलाओं पर अत्याचार के ४६,०७२ मामले दर्ज किए गए थे। इसके बाद २०२४ में यह संख्या बढ़कर ४६,३३० हो गई और वर्ष २०२५ में यह आंकड़ा ५०,३५० तक पहुंच गया। इस तरह तीन साल में लगातार बढ़ते अपराधों ने कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
