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कृत्रिम बुद्धिमत्ता

उखाड़ पखाड़ के इस भौतिक समय में
यह जो हथेली पर उग आई है
कृत्रिम बुद्धिमत्ता
उसमें जीवन ढूंढते हुए
हमने कहा
यह लो भाषा
इसी में छुपा है
रहस्य
थकान चुप्पी और अपमान का।
घर जाओ प्रश्न उठाओ
और कहो कि
अनुभव है।
जीवन का सपाट सत्य
और भोगे हुए सत्य के बीच
रास्ता निकालते हुए
तुम चाहो तो
रच सकते हो
नया साहित्य
नई कहानी
नया इतिहास
और सब कुछ
अपने विवेक से।।
-अन्वेषी

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