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बा-खबर : 4PM के बहाने…

मनमोहन सिंह
देश में डिजिटल आजादी को लगातार कमजोर किए जाने की कड़ी में 4PM न्यूज यूट्यूब चैनल का नाम जुड़ गया है। सरकार ने अब यूट्यूब से कहकर 4PM न्यूज को बंद करने को कहा है। बकौल चैनल के संपादक, ‘मोदी सरकार उनके चैनल से डर गई है।’
डिजिटल युग में अभिव्यक्ति की आजादी कहां?
4PM न्यूज यूट्यूब चैनल के बंद होने का मामला भारतीय डिजिटल मीडिया में सरकारी हस्तक्षेप और बढ़ती सेंसरशिप का एक गंभीर संकेत है। सरकार की नीतियों और कामकाज की तीखी आलोचना करने वाले इस चैनल के खिलाफ कार्रवाई को प्रेस की स्वतंत्रता पर हमले के रूप में देखा जा रहा है। चैनल के संपादक ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि सरकार उनके बेबाक सवालों से डर गई है, जिसके कारण यह कदम उठाया गया है।
डिजिटल मीडिया पर शिकंजा
4PM एक ऐसा मंच था जो लगातार जनसरोकार के मुद्दों और सरकार के कामकाज पर सवाल उठाता था। इस चैनल का बंद होना यह दर्शाता है कि सत्ता अब असहमत विचारों को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है।
यह पहला मौका नहीं है जब किसी स्वतंत्र पत्रकार या चैनल को निशाना बनाया गया हो। इससे पहले भी नेहा सिंह राठौड़ और अन्य पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर जैसी कार्रवाई की गई हैं।
क्या है 4PM का रुख?
चैनल के संपादक और उनसे जुड़े लोगों का कहना है कि वे न तो झुकेंगे और न ही डरेंगे। उनके अनुसार, जब भी सरकार से सवाल पूछे जाते हैं, उसे दबाने के लिए ताकत का इस्तेमाल किया जाता है।
चैनल का यह भी दावा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर किसी स्वतंत्र आवाज को बंद करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने सरकार के इस कदम को लोकतांत्रिक छवि को भारी नुकसान पहुंचाने वाला बताया है।
लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी
यह कार्रवाई सवाल उठाती है कि क्या अब सरकार से सवाल पूछना एक अपराध बन गया है? डिजिटल मीडिया, जो आज के समय में अभिव्यक्ति का एक बड़ा माध्यम है, उस पर लगातार की जा रही कार्रवाई लोकतंत्र को कमजोर कर रही है। यह जनता की आवाज को दबाने का एक तरीका है, जो कि किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए शुभ संकेत नहीं है।
4PM चैनल को बंद करने का फैसला न केवल स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए एक झटका है, बल्कि यह आम जनता के मौलिक अधिकारों पर भी प्रहार है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या 4PM अपनी नई राहें चुनकर इस लड़ाई को आगे बढ़ाएगा या फिर डिजिटल सेंसरशिप की यह आंधी अन्य स्वतंत्र आवाजों को भी खामोश कर देगी।
यह भारत के संविधान के अनुच्छेद १९(१)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के विपरीत है, जिसे केवल राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था जैसे उचित आधारों पर प्रतिबंधित किया जा सकता है। सच्चाई ये है कि व्यंग्यात्मक, आलोचनात्मक या जांच-पड़ताल वाली सामग्री को अधिकतर निशाना बनाया जा रहा है, जिससे राजनीतिक मंशा पर सवाल उठते हैं। गौरतलब है कि द वायर के कई व्यंग्यात्मक कॉर्टून और वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर से हटाने को बाध्य किया गया।

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