प्रभुनाथ शुक्ल. भदोही
गांव-गिरांव से लेके शहर तक एगो नई नस्ल के लोग पैदा हो गइल बा, झूठ के ठेकेदार आ मक्खन-मलाई के महारथी। ई लोग के खासियत ई बा कि अगर सामने वाला कह दे कि सूरज आज पश्चिम से निकलल बा, त ई लोग तुरंत हाथ जोड़ के कह दी का बात करत बानी! हम त कब से देखत बानी, अब रोजे उधर से निकलत हौ।
ई लोग के जुबान में एतना मक्खन रहेला कि अगर रोटी रख दीहल जाय त बिना घी के ही चमक उठी। जेकरा सामने बैठ जइहें, उहे उनका मालिक…महाराज, दुनिया के सबसे तेज दिमाग वाला आदमी बन जाला। अगर साहब छींक मार देसु त ई लोग कह दी, वाह सर, का कमाल के छींक मारनी, पूरा माहौल सुगंधित हो गइल।
असल में ई लोग के सबसे बड़ा हुनर बा झूठ के सच बना देना। अगर कोई काम खराब हो गइल त असली गलती खोजे के बजाय ई लोग कहानी बनावे लगेला।
जइसे सड़क टूटी बा त कहिहें, सर ई टूटी ना, जनता के स्पीड कंट्रोल करे खातिर वैज्ञानिक तरीका बा।
बिजली ना आवे त कहिहें, सर सरकार जनता के प्राकृतिक जीवन जीए के मौका दे रहल बा।
अब त हाल ई हो गइल बा कि सच बोले वाला आदमी बेवकूफ समझल जाला, आ मक्खन लगाने वाला समझदार कहल जाला। गांव के बूढ़ पंडित जी ठीक ही कहले रहलें, आजकल आदमी के काबिलियत काम से ना, मक्खन के मोटाई से नापल जाला। ई मक्खनबाज लोग हर जगह मिल जाई, दफ्तर में, राजनीति में, मंच पर, आ सोशल मीडिया पर भी। नेता जी कुछो बोल देस, ई लोग तुरंत ताली पीट के कह दी वाह! इतिहास बन गइल।
अब इतिहास बनल कि मजाक बनल, ई बात केहू पूछे वाला ना रहेला। सबसे मजेदार बात त तब होला जब ई लोग एके साथ दस गो आदमी के मक्खन लगावे लागेला। सामने वाला बदलते ही सुर बदल जाला। पहिले वाला साहब के सामने कहिहें, आपसे बड़ा कोई नहीं। दूसरा साहब आ गइले त तुरंते कहिहें, हम त शुरू से ही आपके पैâन बानी। अंत में हालत ई हो गइल बा कि सच बेचारा कोना में बैठ के रोता, आ झूठ मंच पर चढ़ के भाषण देता। बाकी उम्मीद अभी जिंदा बा, काहे कि गांव के लोग आज भी कहेला, ज्यादा मक्खन लगावे वाला आदमी पर भरोसा मत कर, ऊ कब रोटी फिसला देई पता ना चली।
!! समाप्त करी!!
