मुख्यपृष्ठसमाचारभाजपा का पासा पलट गया... सहानुभूति की सुनामी पर सवार हुई श्रीकला!

भाजपा का पासा पलट गया… सहानुभूति की सुनामी पर सवार हुई श्रीकला!

-धनंजय सिंह को जेल भेजने से पत्नी की चुनावी स्थिति हुई मजबूत

जय सिंह

लोकसभा चुनाव की घोषणा में बस चंद दिन शेष हैं, मगर भाजपा इसकी तैयारी काफी पहले से कर रही है। एक-एक सीट पर गुणा-गणित जारी है। अगर कहीं उसे गले में कांटा फंसता दिख रहा है तो उस कांटे को वह बड़ी सफाई से कानूनी आड़ में निपटा भी दे रही है। यूपी के बाहुबली रहे धनंजय सिंह को जेल भेजे जाने के पीछे यही गुणा-गणित है। दरअसल, हाल ही में धनंजय सिंह ने लोकसभा चुनाव लड़ने की बात कही थी। इसके बाद भाजपा शीर्ष नेतृत्व के कान खड़े हो गए। भाजपा मिशन ३७० लेकर चल रही है। ऐसे में अगर धनंजय सिंह के कारण कहीं एक सीट का नुकसान न हो जाए इसलिए पुराने मामले में उन्हें जेल भजे जाने की स्क्रिप्ट लिख दी गई।
गौरतलब है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व किसी भी तरह चुनाव जीतने के लिए साम, दाम, दंड … हर दांव आजमा रही है। जहां तक धनंजय सिंह का सवाल है तो वे जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव और बसपा के पूर्व सांसद रह चुके हैं। वे जौनपुर से चुनाव लड़ना चाहते थे। भाजपा ने वहां से कृपाशंकर सिंह को टिकट दिया है। यह तो सभी जानते हैं कि अपने १० वर्षों के शासन में भाजपा ने देश की जनता से अनगिनत वादे किए, पर बेरोजगारी, महंगाई आदि का मसला उसी तरह मुंह बाए खड़ा है। ऐसे में जनता भाजपा के जुमलों से काफी नाराज है। दूसरी तरफ ‘इंडिया’ गठबंधन की मजबूती भाजपा को डरा रही है। यही कारण है कि भाजपा विपक्ष में तोड़-फोड़ कर उसे कमजोर करने की हर जुगत अपना रही है। जहां वह कामयाब नहीं हो पा रही है, वहां कानून के सहारे पुराने मामलों को खोला जा रहा है। धनंजय सिंह का मामला भी इसी तरह का है। मगर अब भाजपा का पासा पलटता नजर आ रहा है। चर्चा है कि धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला सिंह बसपा के संपर्क में हैं और वे पति की जगह चुनाव लड़ सकती हैं। ऐसे में श्रीकला को फायदा होगा और वे सहानुभूति की सुनामी पर सवार होकर चुनाव जीत सकती हैं। जानकारों का मानना है कि धनंजय सिंह को जेल भेजने से पत्नी की चुनावी स्थिति मजबूत हो गई है। बहरहाल, जहां तक यूपी का सवाल है तो देश के इस सबसे बड़े सूबे में रोज इतने उठा-पटक देखने को मिल रहे हैं कि कब क्या हो जाए कहा नहीं जा सकता।
जौनपुर की बात करे तो भाजपा ने वहां से मुंबई के विवादित उत्तर भारतीय नेता कृपा शंकर सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। अगर कृपा शंकर सिंह का राजनीतिक इतिहास जानना हो तो महाराष्ट्र के किसी भी भाजपाई से उसे जाना जा सकता है। चुनाव का बिगुल कभी भी बज सकता है, इसे भांपकर ही धनंजय सिंह ने चुनाव लड़ने के संकेत दे दिए थे। सपा के मुखिया अखिलेश यादव के साथ उनकी मुलाकात भी हो चुकी थी। अगर धनंजय मैदान में उतर जाते तो वहां भाजपा की लुटिया डूबनी तय थी। आश्चर्य तो यह है कि उस वक्त तक समाजवादी पार्टी ने वहां से किसी भी प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की थी। भाजपा को यह भी लग रहा था कि अगर धनंजय सिंह वहां से निर्दलीय भी चुनाव लड़ते हैं तो मुकाबला त्रिकोणीय होगा और भाजपा की सीट साफ हो जाएगी।
इसके बाद आनन-फानन में १० मई २०२० के उस मामले को उजागर किया गया, जिसमें वह व्यक्ति भी अपनी गवाही वापस ले चुका जिसने यह अपराध दर्ज करवाया था। उस अपराध के बारे में जानने से पहले बता दें कि पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर पिछले ३३ वर्षों में ४३ से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। पुलिस ने दो बार इन पर इनाम भी घोषित किया था, लेकिन किसी भी मामले में इनको सजा नहीं हुई थी। एक बार पुलिस ने इनको जेल भेजा था वो भी सबूत छुपाने के मामले में। इनकी दूसरी पत्नी जागृति के हाथों २०१३ में नौकर का खून हो गया था, उसी मामले में धनंजय एक बार जेल गए थे। फिलहाल जिस मामले में कोर्ट ने धनंजय सिंह को सजा सुनाई है। गत १० मई २०२० को लाइन बाजार थाने में नमामि गंगे प्रोजेक्ट के मैनेजर अभिनव सिंघल ने धनंजय सिंह व विक्रम सिंह पर अपहरण, रंगदारी मांगने व जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज कराया था। दूसरे दिन पुलिस ने इन दोनों को गिरफ्तार भी किया था। बाद में जांच के दौरान सभी गवाह बदल गए थे और खुद अपराध दर्ज कराने वाले अभिनव सिंघल ने अपनी तहरीर न देने की बात कहते हुए इस अपराध को ही झूठ साबित कर दिया था। इस मामले में वैसे भी धनंजय को हाई कोर्ट से जमानत मिल चुकी थी। इसके बाद पुलिस ने मामले में फाइनल लगाकर मामला बंद कर दिया, उस दौरान तत्कालीन सीओ सिटी ने वहां की सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल की कॉल डिटेल, लोकेशन आदि जांच में शामिल करने का आदेश देकर मामला फिर शुरू करवाया। सूत्रों की मानें तो पुलिस ने जब दोबारा जांच शुरू की तो पता चला कि अभिनव सिंघल ने अपने मोबाइल नंबर से १० मई २०२० को शाम ५.४३ बजे अपनी कंपनी के सुपरवाइजर को मैसेज किया था। यह वही मैसेज है, जिसको पुलिस और अदालत ने आधार मानकर धनंजय को जेल भेजा है।

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