संजय राऊत- कार्यकारी संपादक
अमेरिका के साथ व्यापार समझौता देश के साथ सीधा राष्ट्रद्रोह है। १५ अगस्त, १९४७ की मध्यरात्रि को जब देश को स्वतंत्रता मिली, तब पंडित नेहरू ने भारत को संप्रभु और खुशहाल बनाए रखनेवाली ‘नियति से समझौता’ किया था। मोदी ने इस समझौते को तोड़कर भारत को अमेरिका का गुलाम बना दिया!
पंडित जवाहरलाल नेहरू ने १५ अगस्त, १९४७ को भारत की संविधान सभा में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एक ऐतिहासिक और भावपूर्ण भाषण दिया था। यह भाषण विश्वभर में ‘नियति के साथ समझौता’ के नाम से प्रसिद्ध है। जब पूरी दुनिया सो रही थी, भारत एक नए युग की दहलीज पर खड़ा था। पुरानी हर चीज को पीछे छोड़कर एक नए युग में कदम रखते हुए भारत को एक स्वतंत्र, संप्रभु राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का संकल्प लिया गया था। आजादी का जश्न शुरू हो गया था। नेहरू ने समझाया कि भारत एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। Tryst with Destiny’ यानी नियति से किया गया वह समझौता, अब प्रधानमंत्री मोदी और उनके लोगों ने तोड़ दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ भारतीय किसानों को गुलामी के कुएं में धकेलनेवाला व्यापार समझौता किया है। भारतीय जनता पार्टी इस गुलामी समझौते का जश्न मना रही है। यह किस प्रकार का विकृत आनंद है? राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के साथ व्यापार समझौते में भारत को जुतियाया है और मोदी और उनके लोग ‘थैंक यू, थैंक यू’ कहकर जश्न मना रहे हैं। कार्टूनिस्ट मंजुल के शब्दों में, वह भी भारतीय करदाताओं के पैसे से, यह सच है।
अब यह होगा
मोदी ने अमेरिका के साथ चार महीने से अटके व्यापार समझौते को जल्दबाजी और हड़बड़ी में निपटा दिया और भारत के साथ समझौता होने की घोषणा सबसे पहले अमेरिका ने बड़ी खुशी से की। पाकिस्तान के साथ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी राष्ट्रपति ट्रंप ने ही पहले ‘सीजफायर’ की घोषणा कर दी थी। अब व्यापार समझौते के मामले में भी ऐसा ही हुआ है। अमेरिका के
प्रेसिडेंट ट्रंप और अमेरिकी कृषि मंत्री ने बताया कि इस समझौते से उनके देश को वैâसे लाभ हुआ। क्या भारतीय प्रधानमंत्री यह बता सकते हैं कि यह समझौता उनके लिए लाभकारी है? हमें संक्षेप में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की खामियों को समझना चाहिए।
– इस ट्रेड डील से भारत पर टैरिफ ५० प्रतिशत से १८ प्रतिशत हो गया है। इसे जीत बताया गया जो कि गलत है। अब तक अमेरिका भारत पर औसतन ३ फीसद से कम टैरिफ लगाता रहा है। अब अमेरिका भारतीय एक्सपोर्ट पर १८ फीसदी टैरिफ लगाएगा!
– भारत अमेरिका से आयात होनेवाले सामानों पर ‘शून्य’ टैरिफ लगाएगा। अब तक भारत अमेरिकी सामानों पर ३० से १०० प्रतिशत तक टैरिफ लगाता था। यह अब भारत के लिए घाटे का सौदा बन गया है। भारत अब से अमेरिका से ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि उत्पाद और कोयले सहित अन्य वस्तुओं की ५ अरब डॉलर की खरीद बढ़ाएगा। इससे अन्य मित्र देशों के साथ भारत के व्यापारिक संबंध कमजोर होंगे। भारतीय बाजार पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण होगा।
– भारत अब रूस से सस्ता तेल नहीं खरीदेगा। नए समझौते के अनुसार उसे अब अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदना होगा। इससे भारत को ८०,००० करोड़ रुपए का नुकसान होगा।
– भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से केवल गुजरात के हीरा व्यापारियों को ही लाभ दिखा है। मुंबई का हीरा व्यापार गुजरात में स्थानांतरित हो गया। यह वहीं बना रहे इसलिए भारत से निर्यात किए जाने वाले कच्चे loose) हीरे और रंगीन रत्नों पर अमेरिका में शून्य प्रतिशत यानी जीरो कर होगा। वहीं १८ प्रतिशत कर के बोझ से श्रमिक, किसान और छोटे व्यापारी मारे जाएंगे।
– अमेरिकी किसानों के उत्पाद, अनाज, दालें, दूध, पनीर, फल, फूल, सब कुछ भारतीय बाजार में ‘शून्य’ करों के कारण बेहद सस्ते दामों पर उपलब्ध होंगे। इससे भारतीय किसानों का बचा-खुचा अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।
देश गिरवी
अमेरिका के साथ हुआ समझौता देश को गिरवी रखने जैसा सौदा है। इस समझौते के लिए मोदी ने किसकी अनुमति ली? चार महीने पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर कुछ शर्तें लगाई थीं। भारत को रूस से तेल खरीदना बंद करना होगा। तब मोदी ने कहा था, ‘तेल किससे खरीदना है यह भारत खुद तय करेगा।’ अब मोदी ने ट्रंप की शर्त मान ली है। मोदी सरकार का यह रुख कि वह अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में प्रवेश नहीं करने देगी, अब धराशायी हो गया है। जब पूरा भारतीय बाजार अमेरिकी उत्पादों के लिए खुल जाएगा तो भारतीय उद्योग और व्यापार की रक्षा वैâसे होगी? जब अमेरिकी ‘माल’ पूरे भारतीय बाजार में आ जाएगा तो ‘मेक इन इंडिया’ और हमारी देसी कंपनियों का क्या होगा? ‘स्टार्टअप इंडिया’, ‘कौशल विकास योजनाओं’ की तो हवा ही निकल गई। इस ट्रेड डील के बाद अमेरिकी कृषि सचिव ने खुशी जाहिर की तो एक बात साफ है। मोदी ने भारतीय किसानों की बलि देकर अमेरिकी किसानों को फायदा पहुंचाया। अंग्रेज व्यापारी बनकर आए और भारत पर कब्जा कर लिया और हमें गुलाम बना लिया। अब अमेरिका के मामले में भी यही तस्वीर दिख रही है। मोदी इतने नतमस्तक क्यों हुए? पहला कारण यह है कि मोदी के उद्योगपति मित्र गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिकी अदालत में वित्तीय धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी का मामला चल रहा है। ‘एपस्टीन फाइल’ नाम की ‘ब्लू फिल्म’ के साथ फाइल्स में भारत के बारे में काफी माल मसाला है। राहुल गांधी पहले ही इस मामले का भंडाफोड़ कर चुके हैं इसलिए खुद को बचाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और उनके लोगों ने भारत को अमेरिका का गुलाम बनाने का समझौता कर लिया!
अमेरिका की घोषणा
प्रधानमंत्री मोदी को महामानव माननेवाले अंधभक्तों ने श्रीराम का राज बेचने को रख दिया और भारत खरीदने की घोषणा सबसे पहले अमेरिका ने की। भारत ने ‘समझौते’ की घोषणा नहीं की, बल्कि यह घोषणा वॉशिंगटन से की गई। अमेरिका के साथ हुआ समझौता राष्ट्रविरोधी है। कोई भी देशभक्त इस समझौते का समर्थन नहीं करेगा। भाजपा और देशभक्ति का अब कोई संबंध नहीं रह गया है। उनकी भूमिका ‘राष्ट्र प्रथम’ की जगह ‘व्यापार प्रथम’ हो गई है इसलिए वे इस राष्ट्रविरोधी समझौते की खुशी मना रहे हैं।
‘देश की बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया …’ उनका व्यवहार ऐसा है।
१५ अगस्त (१९४७) की मध्यरात्रि को पंडित नेहरू ने भारत और भारतवासियों की सेवा और कल्याण के लिए समर्पित रहने वाली ‘नियति के साथ समझौता’ किया था। नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को तोड़ दिया है।
