अनिल तिवारी
१२ जून, २०२५ को अमदाबाद में बोइंग ७८७ ड्रीमलाइन के भीषण हादसे के बाद सप्ताह भर में ही इसी जेट लाइनर की एक के बाद एक कई तकनीकी खामियां सामने आई हैं। अमदाबाद हादसे से पहले भी इसे लेकर कुछ शिकायतें थीं, पर उससे पहले के १०-१२ वर्षों में ऐसा कुछ खास नहीं था। लिहाजा, इसकी क्रोनोलॉजी सवाल खड़े करती है। प्रश्न खड़ा करती है कि लगभग डेढ़ दशक से हवाई सेवा से जुड़े ७८७ ड्रीमलाइनर में हाल के साल-छह महीनों में आखिर ऐसा क्या हुआ कि इसकी तकनीकी गड़बड़ियों ने एविएशन मार्वेâट की ए, बी और सी ही बदलकर रख दी।
२०१८ और २०१९ में हुए बोइंग ७३७ मैक्स के हादसे सुर्खियों में थे। इन हादसों के बाद से दुनिया भर में बोइंग की साख गिरी। गरुडा एयरलाइंस, कतर एयरवेज, वर्जिन ऑस्ट्रेलिया, लायन एयर और फ्लाय ए डील एयरलाइंस बोइंग को दिए ऑडर्स या तो पूरी तरह वैंâसिल कर रहे थे या फिर उनमें भारी कटौती कर रहे थे। इन एयरलाइंस ने एविएशन मार्वेâट के ‘बी’ यानी बोइंग से मुंह मोड़कर मार्वेâट के ‘ए’ यानी एयरबस से कई बड़े सौदे कर लिए। रायन एयर ने तो मार्वेâट के ‘सी’ यानी की चाइना के कॉम एक्स सी ९१९ की तरफ रुख कर लिया। इस बीच हालिया, ड्रीमलाइनर हादसे और उसके बाद से ड्रीमलाइनर्स को लेकर आनेवाली शिकायतों ने तो तमाम अन्य एयरलाइंस को भी इस रास्ते पर चलने को मजबूर कर दिया है। चीन की एयर सर्दन, एयर नार्दन और एयर चाइना तो पहले ही सरकारी दबाव में बोइंग के लिए पूरी तरह से दरवाजे बंद कर चुकी थी, अब बोइंग के लिए बंद ये दरवाजे उन्हीं की स्टेट ऑन कॉमेक के लिए भविष्य की संभावनाओं के दरवाजे खोल रही है। जिसे चाइना बोइंग से सुरक्षित विकल्प के रूप में पेश कर रहा है। अर्थात बोइंग की बर्बादी का लाभ एयरबस के अलावा अकेले चीन के हिस्सा जाता ही नजर आ रहा है जो किसी साजिश की संभावना से इंकार नहीं करता।
ड्रीमलाइनर से ड्रीमब्रेकर! …बोइंग पर तीसरी शक्ति का दुष्प्रभाव
किसी भी हवाई यात्रा के लिए दो घटक सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं, पहला एक सुरक्षित एयरक्राफ्ट और दूसरा अनुभवी पायलट। अमदाबाद हादसे के मामले में दोनों ही पहलुओं पर किसी भी तरह के समझौते के संकेत नहीं हैं। फिर ये हादसा कैसे हुआ? इस पर गहन शोध जरूरी है।
जहां तक ७८७ ड्रीमलाइनर का सवाल है तो वो इस युग में बोइंग का सबसे आधुनिक व सुरक्षित जेट लाइनर माना जाता रहा है। उस बोइंग का जो अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा के लिए स्पेस लाइनर्स तक मुहैया कराती है। यह बात दीगर है कि हाल के वर्षों में बोइंग के स्पेस लाइनर्स पर भी कई सवाल उठे हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन तक अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके सहयोगियों को भी बोइंग का स्पेस लाइनर ही लेकर गया था, पर वो उन्हें वापस लौटाकर लाने में विफल साबित हुआ और आखिरकार ९ महीनों बाद, एलॉन मस्क की स्पेस एक्स की मदद से वे धरती पर वापस लौट पाए। इससे कम से कम यह बात तो तय है कि बोइंग की तकनीकी काबिलियत में हाल के दशकों में कहीं न कहीं कोई न कोई समझौता तो जरूर हुआ है, जिस पर कंपनी के विसल ब्लोवर्स ने भी आवाज उठाई है। हालांकि, ड्रीमलाइनर्स को लेकर छोटी-मोटी शिकायतों के अलावा कोई बड़ी समस्या तो बोइंग के सामने भी पेश नहीं आ रही थी। जो आज अचानक डेढ़ दशक बाद धड़ाधड़ एक के बाद एक उजागर हो रही हैं जो निश्चित ही चिंतन का विषय है।
करीब १४-१५ वर्ष पहले कमर्शियल सेवा में शामिल किए जाने के बाद अब जब ड्रीमलाइनर अचानक से ‘ड्रीम ब्रेकर’ बना तो पूरी दुनिया की नजर बोइंग से हटने लगी। हाल के दिनों में जापान, साउथ कोरिया और खुद अमेरिका की एयरलाइंस को इसके साथ दिक्कतें पेश आई थीं। इस साल जनवरी में तो एक अमेरिकी एयरलाइंस का ड्रीमलाइनर नाइजेरिया के आसमान में अचानक से गंभीर संकट में फंस गया था। ठीक वैसे ही संकट में जैसा अमदाबाद में एयरइंडिया के अनुभवी पायलटों के सामने आया था। फर्क सिर्फ इतना था कि अमदाबाद में हवाई जहाज चंद सौ फीट की ऊंचाई पर था, जबकि नाइजेरिया में वो ऊंचे आसमान में तैर रहा था। लिहाजा, नाइजेरिया में पायलटों को उस पर काबू पाने का वक्त मिल गया और उन्होंने हवाई जहाज को सुरक्षित लैंड करा लिया। अमदाबाद के मामले में भी पायलट और फर्स्ट ऑफिसर को इतना वक्त मिला होता तो शायद वे हादसे को टाल सकते थे। यहां अनुभवी होने के बावजूद वे कैसे बदनसीब साबित हो गए? यह चिंतन का विषय है।
कैप्टन सभरवाल जैसा एयर इंडिया का वो पायलट जिसने ७८७ से बड़े बोइंग के कई एयरक्राफ्ट वर्षों तक उड़ाए हों, जो ७७७ उड़ाने की ट्रेनिंग तक देते हों, जो एक दशक से ज्यादा समय तक ७८७ ड्रीमलाइनर्स को लगातार उड़ाने का अनुभव रखते हों, धैर्यशील और नंबर वन श्रेणी के पायलट हों, उनकी गलती से यह हादसा होना सहज नहीं लगता। न ही तमाम ड्रीमलाइनर्स की एक दशक बाद अचानक से तबीयत बिगड़ना ही सहज लगता है। अमदाबाद हादसे के बाद सप्ताह भर में चेन्नई, हांग कांग, दिल्ली और अन्य कई स्थानों से ड्रीमलाइनर्स को अचानक से तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। निश्चित तौर पर इसमें किसी तीसरे पक्ष का किसी न किसी तरह से हस्तक्षेप हो सकता है जो मैक्स हादसों के बाद साख खो रहे बोइंग की हर हाल में बर्बादी तय करना चाहता हो, तय करना चाहता हो कि बोइंग के हर जेट लाइनर में वार्निंग अलार्म, इंजिन अलार्म और गियर अलार्म बजते रहें। यदि ये बजते रहेंगे तो एविएशन मार्वेâट की ए, बी और सी भी जरूर बदलेगी।
