नवीन सी. चतुर्वेदी
चौपाल पै चर्चा चल रही हुती कि ट्रंप नें सबकी नाक में दम कर रखी है। का इत्ती बड़ी दुनिया में एक हु ऐसौ बीर बांकौ नाँय नें जो या ट्रंप की सनक कौ इलाज कर सवैâ? हमनें कही यामें कौन सी बड़ी बात है, ट्रंप की सनक कौ इलाज तौ एक दिना में ही है सवैâ। सब हमारी तरफ देखन लगे। हमनें कही भौत ही असान है। सबसे पहले तो इसको इंडिया लाया जाय, दिल्ली में उतारा जाय, जमना घाट पर लेकर जाया जाय, फिर कहा जाय कि ट्रंप बाबू अगर आप को चुनाव जीतना है तो जमनाजी में गोता लगाओ। यै नखरे करैगौ, बोलैगौ-पानी गंदा है, मगर कह्यौ जाय कि चुनाव जीतना है तो गोता तो लगाना ही पड़ेगा। चुनाव कौ लालच दै’कें नेता’न सों कछू भी करवायौ जाय सवैâ। चुनाव में हिंदू नेता’न कों मजार पै चादर चढ़ाते भए और मुस्लिम नेता’न कों मंदिर’न में ढोक लगाते भए खूब देखौ है हमनें। खैर अपुन कों का? अपुन तौ ट्रंप की बात कर रहे हैं। देख लीजो चुनाव कौ नाम सुनते ही नाक बंद करकें गोता लगाय लेयगौ। पतौ है फिर का होयगौ? प्रदूषित पानी के कारन वाके सिगरे सरीर में खुजरी हैवे लगैगी। दिनरात ईरान-ईरान चिल्लायवे वारौ खुजरी-खुजरी चिल्लायवे लगैगौ। वाके बाद याकों वृंदावन लाय कें बंदर’न के बीच में छोड़ दियौ जाय। न चश्मा बचैगौ, न पर्स दुनिया कों दौड़ायवे वारौ बंदर’न के पीछें-पीछें न भाजै तौ कहियो। वाके बाद याकों लोटा भर कें भांग पिवायी जाय और भांग पिवाय कें याकों बर्र के छत्ता के नीचें खड़ौ कर दियौ जाय फिर बर्र के छत्ता में खेंच कें एक ढेला मारौ जाय। म्हों फुलायवे कौ भौत सौक है नें याकों! वे बर्र या दारी के कों ऐसी-ऐसी जगें सुजामंगी कि दुबारा म्हों फुलायवौ भूल जायगौ। वाके बाद जो करैगी भांग करैगी। भांग के नसा में यै सोय जावैगौ। सोय कें उठैगौ तबतक याकौ दिमाग ठिकानें लग चुकौ होयगौ। दुनिया में शांति स्थापित है चुकी होयगी। वाके बाद याकों टटिया-स्थान पै मोहिनी-बिहारी जी के दरसन करवाये जाएं, जैसें ही यै मोहिनी-बिहारी जी के दरसन करैगौ, याके ज्ञान चक्षु खुल जामंगे, यै समझ जावैगौ कि ‘जो सुख पायौ रामभजन में, सो सुख नाँहि अमीरी में’ और भैया या तरें एक ही दिन में याकी सनक कौ इलाज है जायगौ। फिर याकों समझायौ जाय
हेकड़ी टांग देउ खूंटा पै
हर सिकंदर नें धूर चाटी है
