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नमस्ते सामना

होली पर पाठकों की विशेष कविताएं

खुशियां भर देती होली... होली का हर रंग अलग होता है, हरा, लाल, नीला, गुलाबी सब बेमिसाल रंगों की होली होती है, जीवन में जो खुशियां भर देती...

होली विशेष : अच्छे दिन आने वाले हैं

-डाॅ. रवीन्द्र कुमार सालों बाद बीवी बना रही है मायके जाने का प्लान अच्छे दिन आने वाले हैं टिकट कन्फर्म कराने को मैंने लड़ा दी है जान अच्छे दिन आने...

मुट्ठी में आकाश

​तप्त धूप में जलकर ही कुंदन निखरकर आता है, ​कांटों की गोदी में ही गुलाब मुस्कराता है। ​थपेड़े लहरों के सहकर जो पत्थर रुक नहीं पाता, ​वही...

पाठकों की होली कविताएं

भाषा प्रांत धर्म का टंटा। चलो जलाएं होली में।। जहां प्रेम है, वहीं पहुंच कर। हाथ मिलाएं होली में।। करें होलिका दहन आज हम। नाचें कूदें होली में।। सब रंगों...

फिसलती समय की रेत

​मुट्ठी से फिसलती रेत है यह जीवन की डगर, धूप-छांव के खेल में बीत रहा हर एक पहर। कभी खुशियों के गीत, कभी सिसकियों का शोर, अनजानी...

पाठकों की होली कविताएं

बरसाने में होली ब्रज की गलियों में ग्वाल बाल संग कान्हा ने खेली होली। बहुत अबीर गुलाल उड़ायो धूम मचायो, रंग लगायो गोपिन संग की बरजोरी। कान्हा अब चलें बरसाने मैं...

सिर मुड़ाते ही ओले पड़े

मेरे प्यार का ये अफसाना, तौबा-तौबा गलती का भरिए जुर्माना, तौबा-तौबा मैं तो समझा था खुशखबरी आएगी इतना ज्यादा टैक्स बढ़ाना, तौबा-तौबा झोली भर-भरकर हम सबने वोट किया ऐसा...

आज की जंग

चढ़ गया नया साल दीवानों जोशे जिगर, होश में कदम, संभालों...जवानों। चुनौतियां नई नित आ ही जाती कमजोरियां भी हर रोज आंख दिखाती हर पल यूं अंजान खड़ा...

बड़ी गंदगी है…

बड़ी गंदगी है बड़ा है तमाशा। उधर रोशनी है इधर है निराशा ।। यह जो हवा बह चली आसमानी । यही है मुसीबत यही है हताशा ।। शब्दों...

यह चेहरे…

रिश्तों के रंग ‘बदलते’ यह चेहरे, जिंदगी में क्यों साथ छोड़ देते हैं? उम्मीदों का यह दामन न जाने क्यों खत्म हो रहा, लगता है उनके चेहरे...

तरक्की किसके नाम?

भूख हर एक शाम तक पहुंची, पर न रोटी ही थाल तक पहुंची। सिंहासन चढ़ते रहे चेहरे सब, भूख क्यों नीलाम तक पहुंची। आज रोटियों पर पहरे बैठे, नीति...

अनंत से जुड़ जाएं

हम सभी अनंत के अंश हैं। चूंकि अंश अपने अंशी से मिलना चाहता है इसलिए अनंत से जुड़ जाएं। अनंत की यात्रा आत्मा से परमात्मा के मिलन की...

अंकुरित होगी वहीं!

पर्दे के पीछे क्या होता है क्यों कर तुम्हें जानना है जो घटता आंखों के आगे समाधान उसका कभी निकलता नहीं माना संबंध अपनों से टूटते दूसरे भी निभा...

महाशिवरात्रि पर पाठकों की कविताएं

शिव को अर्पण संग गंग गले नाग, नहीं क्रोध नहीं राग, बैठे हैं बाबा विराग, शंकर भंडारी हैं l गाड़ दिया है त्रिशूल, नाश करे शत्रु मूल, नहीं तुम जाना भूल, भोले...

सबको खुश करते-करते, खुद को खो देना

लेखिका: सना खान कभी आपने महसूस किया है… आजकल ज़िंदगी कुछ ज़्यादा ही तेज़ भाग रही है। हर घर में एक कहानी चल रही होती है, और इन...
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