मुख्यपृष्ठसमाचारसंतान 'बाईं चांस नहीं बाई च्वाइस' चुनें- डॉ राम मनोहर

संतान ‘बाईं चांस नहीं बाई च्वाइस’ चुनें- डॉ राम मनोहर

सामना संवाददाता / सुल्तानपुर

चिन्मय मिशन के पांच दिवसीय ज्ञान यज्ञ का श्रीगणेश करते हुए विद्या भारती के क्षेत्रीय सह संगठन मंत्री राम मनोहर ने कहा कि हम इंद्रियों के अधीन न होकर समझ के साथ आगे बढ़ें। यही समाज की देन है। वे बतौर मुख्य अतिथि ज्ञान यज्ञ के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। मिशन की स्थानीय इकाई की ओर से रामचरित मानस आधारित श्रीराम-वाल्मीकि संवाद व चतुश्लोकी भागवत का शुभारंभ हुआ। यह प्रवचन १८ मार्च तक सुबह और शाम में चलेगा।
शहर के पंडित रामनरेश त्रिपाठी सभागार में पांच दिवसीय ज्ञान यज्ञ को चिन्मय मिशन नासिक के आचार्य स्वामी अद्वैतानंद ने संबोधित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्या भारती के क्षेत्रीय सहसंगठन मंत्री डा. राममनोहर ने किया। बतौर मुख्य अतिथि उन्होने कहा कि दुनिया का हर वर्ग मानव सुख के लिए लगा है। जीवन के चारों अवस्थाओं का आचरण निश्चित है। ज्ञान ही ऐसा है जिसका आचरण निश्चित नहीं है। इसके लिए बहुत बड़े बड़े संतों ने प्रयास किया किंतु अभी भी यह प्रयास जारी है। शिक्षा में बेतहाशा वृद्धि हुई। तमाम संसाधन बढ़े है। साधनों के पीछे दुनिया तेजी से बढ़ रही है। इसके बाद भी सुखो में वृद्धि उतनी नहीं हुई। इंद्रियों के अधीन न होकर समझ के साथ आगे बढ़े, यही समाज की देन है।
उन्होंने कहाकि आज जब लोगों से सवाल किया जाता है कि आपको बच्चा क्यों चाहिए तो लोग बोलते हैं कि हमें बच्चा अपने वंश व बुढ़ापे के सहारे के लिए चाहिए। उन्होंने एक सवाल करते हुए कहाकि ‘बच्चा बाईचांस नहीं, बाई च्वाइस’ चुने। उसे अपनी बुढ़ापे की लाठी और वंश वृद्धि के लिए नहीं बल्कि ऋण से मुक्ति के लिए चाहिए। अतिथियों का स्वागत एवं आभार चिन्मय मिशन के संरक्षक डा. जेपी सिंह ने किया।

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