मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनासिटीजन रिपोर्टर : अंबरनाथ में बढ़ रहा है कचरा

सिटीजन रिपोर्टर : अंबरनाथ में बढ़ रहा है कचरा

अंबरनाथ

एक तरफ जहां महाराष्ट्र सरकार की तरफ से साफ-सफाई के लिए अभियान चलाया जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ खुद मुख्यमंत्री के गृहनगर ठाणे के   अंबरनाथ शहर में बढ़ती गंदगी ने यह साबित कर दिया है कि अंबरनाथ की सफाई राम भरोसे है। मुख्यमंत्री के प्रयासों को यहां झटका लग रहा है। ‘दोपहर का सामना’ के सिटीजन रिपोर्टर रोहित प्रजापति अंंबरनाथ शहर की गंदगी के मुद्दे को सामने लाए हैं।
ऐतिहासिक शहर बना डंपिंग ग्राउंड
रोहित प्रजापति का कहना है कि अंबरनाथ एक ऐतिहासिक शहर है। यह अंग्रेजों के काल का औद्योगिक शहर रहा है। अंंबरनाथ की गंदगी यह साबित करती है कि अंबरनाथ अब डंपिंग ग्राउंड बनता जा रहा है। अंबरनाथ-पूर्व की अपेक्षा पश्चिम में गंदगी काफी है जबकि नगरपालिका मुख्यालय अंबरनाथ-पश्चिम में है। अंबरनाथ नपा मुख्यालय के पीछे से मुख्य नाला बहता है। अंबरनाथ में बढ़ती गंदगी और बदबू से अंबरनाथ बदनाम हो रहा है। स्वछता विभाग की अनदेखी के कारण अंबरनाथ रेलवे स्टेशन परिसर से लेकर भास्कर नगर तक गंदगी पैâली हुई है।
रामभरोसे स्कायवॉक
अंबरनाथ रेलवे स्टेशन के करीब बने स्कायवॉक की स्थिति दयनीय है। स्कायवॉक देर रात को शराबियों का अड्डा बन जाता है। इस बात का प्रमाण स्कायवॉक पर पड़ी शराब की खाली बोतलें हैं। इतना ही नहीं कल्याण-बदलापुर महामार्ग के समीप के स्कायवॉक के नीचे कचरे का अंबार देखा जा सकता है। नपा के करीब ही ये कचरे के ढेर और नालों में जमा कचरा ‘दीपक तले अंधेरा’ जैसी कहावत को चरितार्थ करता है।
गंदगी से हो रही है बीमारी में वृद्धि 
सवाल उठता है कि क्या अंबरनाथ शहर स्वच्छ भारत अभियान का हिस्सा नहीं है? इतनी गंदगी और बदबू यह प्रमाणित करती है कि अंबरनाथ नपा के सफाईकर्मी और अधिकारी किस तरह से सफाई के प्रति अनदेखी कर रहे हैं। बढ़ती गंदगी के कारण आम लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। मच्छरों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है, जिससे बीमारी बढ़ रही है। छाया अस्पताल में डेंगू, मलेरिया के मरीज मच्छरों के प्रकोप का पुख्ता प्रमाण हैं।

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