मुख्यपृष्ठखबरेंफॉर्म-६ पर आयोग का दावा...अदालत में अटका!

फॉर्म-६ पर आयोग का दावा…अदालत में अटका!

-सुप्रीम कोर्ट फिर बोला- हमने मंजूरी नहीं दी
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाले संशोधित फॉर्म-६ पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि बिहार की एसआईआर सुनवाई में इस फॉर्म की वैधता पर कोई फैसला नहीं हुआ था। अदालत ने यह भी कहा कि उसने फॉर्म को न मंजूरी दी है, न खारिज किया है।
सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा वी. मोहना की पीठ के सामने याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि निर्वाचन आयोग अपने दस्तावेजों और संचार में संशोधित फॉर्म-६ को सुप्रीम कोर्ट से मंजूर बताया है। इस पर न्यायमूर्ति बागची ने स्पष्ट किया कि बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण की सुनवाई के समय नया फॉर्म अदालत के सामने विचाराधीन ही नहीं था। इसलिए उस मामले में इस पर कोई न्यायिक निर्णय नहीं हुआ। फॉर्म-६ का उपयोग मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के आवेदन के लिए होता है। विवाद इस फॉर्म के साथ जोड़ी गई अतिरिक्त घोषणा को लेकर है। आलोचकों का कहना है कि इससे पहली बार मतदाता बनने वालों के लिए आवेदन में बाधा आ सकती है। आयोग ने सितंबर में कहा था कि एसआईआर के दौरान फॉर्म के साथ जोड़ी गई घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था। अदालत की ताजा टिप्पणी ने उस दावे की सीमा स्पष्ट कर दी है। फिलहाल अदालत ने संशोधित फॉर्म को अवैध घोषित नहीं किया है। उसका संदेश इतना है कि बिहार एसआईआर के फैसले को इस फॉर्म की न्यायिक मंजूरी के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।

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