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करोड़ों रुपए पानी में…गंदगी में डुबे मुंबई के शौचालय!..कहीं पानी नहीं, तो कहीं बिजली नदारद… महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई में सार्वजनिक शौचालयों की बदहाल स्थिति को लेकर महायुति सरकार घिरती नजर आ रही है। करोड़ों रुपए के बजट और स्वच्छता के बड़े-बड़े दावों के बावजूद शहर में शौचालयों की भारी कमी और अव्यवस्था ने मुंबईकरों की परेशानी बढ़ा दी है। कई जगह शौचालयों में पानी की व्यवस्था नहीं है तो कहीं बिजली ही नदारद है, जिससे मूलभूत सुविधा भी संकट में पड़ गई है। इस हालात का सबसे ज्यादा खामियाजा महिलाओं को उठाना पड़ रहा है, जबकि झोपड़पट्टी इलाकों में शौचालयों की दुर्दशा और गहरी नजर आ रही है। महंगे बजट के बावजूद बुनियादी व्यवस्था चरमराने से महानगरपालिका और महायुति सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मुंबई में सार्वजनिक शौचालयों की बदहाल स्थिति को लेकर महायुति सरकार और मुंबई मनपा एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। विधान परिषद में पूछे गए लिखित सवाल ने महानगर की स्वच्छता व्यवस्था की हकीकत सामने ला दी है। आरोप है कि स्वच्छ भारत अभियान के मानकों के बावजूद शहर में शौचालयों की भारी कमी है, जिससे विशेषकर महिलाओं को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मुंबईकरों को झेलनी पड़ रही भारी असुविधा
विधान परिषद में शिवसेना के गुट नेता व सदस्य एड. अनिल परब द्वारा पूछे गए लिखित सवालों में कहा गया कि वर्ष २०१८ से २०२४ के सर्वेक्षण में यह सामने आया कि एक शौचालय का उपयोग औसतन ७५२ पुरुष और १८२० महिलाएं कर रही हैं, जबकि स्वच्छ भारत अभियान के मानकों के अनुसार १०० से ४०० पुरुषों और १०० से २०० महिलाओं के लिए एक शौचालय होना चाहिए। इसके अलावा कई इलाकों में लगभग १५०० पुरुष और ८०० से ९०० महिलाओं के लिए केवल एक शौचालय उपलब्ध होने की बात भी सामने आई है, जिससे मुंबईकरों को भारी असुविधा झेलनी पड़ रही है।

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