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मुंबई में साइबर क्राइम खतरनाक स्तर पर! … ४५० से अधिक गिरफ्तारियों के बाद भी अपराधियों के हौसले बुलंद

– एक क्लिक करते ही हो रहा है खाता साफ!

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
मुंबईकरों को सावधान होने की जरूरत है, क्योंकि शहर में साइबर क्राइम का विस्फोट खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। ‘टास्क’ के नाम पर डिजिटल जाल बिछाकर ठग आम लोगों को निशाना बना रहे हैं। इस जाल से एक क्लिक करते ही खाता साफ हो रहा है। फर्जी ऐप, नकली ग्रुप और संगठित नेटवर्क के जरिए निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी की जा रही है, जिससे आम नागरिक आसान शिकार बनते जा रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस तरह के २,१६३ मामले दर्ज हुए है और ४५५ गिरफ्तारियां की गई हैं। इसके बाद भी साइबर अपराध थमने का नाम नहीं ले रहा। विधानसभा में लिखित जवाब में खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की स्वीकारोक्ति के बावजूद इस डिजिटल लूट पर अब तक प्रभावी लगाम नहीं लग पाई है, जिससे मुंबईकरों के सामने बड़ा खतरा खड़ा हो गया है।
दक्षिण मुंबई के एक ६८ वर्षीय शेयर ट्रेडर से करीब १०.९८ करोड़ रुपए की साइबर ठगी का मामला सामने आने के बाद राज्य में साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला इतना बड़ा है कि इसके तार पांच राज्यों तक पैâले पाए गए। विधानसभा में लगातार बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर लिखित कड़े सवालों की बौछारों पर सरकार घिरती नजर आई। जानकारी के अनुसार, पीड़ित ट्रेडर को व्हॉट्सऐप पर ट्रेडर टाइटन वीआईपी ५६ नामक ग्रुप से जोड़ा गया और वॉरबर्गपिन्सिन नाम के फर्जी ट्रेडिंग ऐप के जरिए बड़े मुनाफे का लालच देकर अलग-अलग बैंक खातों में निवेश के नाम पर रकम जमा करवाई गई। बाद में यह पूरा नेटवर्क ठगी का निकला। इस मामले में ९ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और २.३६ करोड़ रुपए की राशि फिलहाल होल्ड की गई है। इसी तरह विक्रोली की एक शिक्षित युवती को टास्क और रिव्यू के नाम पर टेलीग्राम और व्हॉट्सऐप के जरिए जाल में फंसाकर ११.४२ लाख रुपए की ठगी की गई। शुरुआत में उसे छोटे-छोटे कमिशन देकर भरोसा दिलाया गया और फिर बड़ी रकम निवेश के नाम पर ठग ली गई। हालांकि उसे १२.६८ लाख रुपए का आभासी मुनाफा दिखाया गया, लेकिन असल में पैसा वापस नहीं मिला। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष २०२५ में राज्य में निवेश से जुड़े साइबर प्रâॉड के २,१६३ मामले दर्ज हुए, जिनमें ४५५ आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। इसके बावजूद रोजाना हजारों लोग ऐसे स्वैâम का शिकार हो रहे हैं, जिससे साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
५० साइबर लैब्स सक्रिय
सरकार ने महाराष्ट्र साइबर सुरक्षा परियोजना के तहत नई मुंबई के महापे में मुख्यालय स्थापित कर ५० साइबर लैब्स को सक्रिय किया है और १,००० पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। साथ ही हेल्पलाइन १९३० और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। फिर भी हकीकत यह है कि ठग नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकारी उपाय पर्याप्त हैं या फिर साइबर अपराधियों का जाल सिस्टम से कहीं ज्यादा मजबूत हो चुका है।

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