अरुण कुमार गुप्ता
भाजपाई अंधभक्त हर समय ‘मोदी हैं तो मुमकिन है’, कहते हुए नहीं अघाते हैं। हां, उनकी बातों में सच्चाई भी है। जिस देशप्रेमी व्यक्ति को भारतरत्न मिलना चाहिए, उसे मोदी सरकार ने जेल में ठूंस दिया। हम बात कर रहे हैं लद्दाख के जल, जंगल, जमीन की बात करने वाले सोनम वांगचुक की। जो सिर्फ एक सामाजिक कार्यकर्ता ही नहीं हैं, बल्कि साइंटिस्ट, शिक्षाविद और क्लाइमेट एक्टिविस्ट भी हैं। उन्होंने लद्दाख को बाहरी कंपनियों से बचाने के लिए सिक्स शेड्यूल और पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग के साथ आंदोलन किया। इससे नाराज होकर मोदी सरकार ने एनएसए लगाकर उन्हें जेल में डाल दिया। ५ महीने से ज्यादा समय सोनम वांगचुक ने जेल में बिताए। गत १७ मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले मोदी सरकार को लगा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में टिक नहीं पाएगा। इसलिए सुनवाई से पहले ही सोनम पर लगा एनएसए भी हटा दिया गया और उन्हें जेल से रिहाई भी कर दिया गया। दलील दी कि सोनम के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं। यह सोचने वाली बात यह है कि उस व्यक्ति पर अभिनेता आमिर खान की फिल्म ३ ईडियट्स बनी थी और फिल्म में फुनसुक वांगडू का रोल भी उन्हीं पर आधारित था। यही नहीं, सोनम को एशिया का नोबेल कहा जाने वाला रेमन एक्सिस अवार्ड, पर्यावरण क्षेत्र में काम को देखते हुए स्विट्जरलैंड का रोलेक्स अवॉर्ड फॉर इंटरप्राइजेज मिला। जिस व्यक्ति ने आइस टू टेक्नोलॉजी, सोलर हीटेड मिलिट्री टैंक, लो कॉस्ट ग्रीनहाउस जैसे आविष्कार किए और पर इनका पेटेंट नहीं कराया। क्योंकि सोनम का मानना था कि पेटेंट कराने से लोगों को पैसे देने पड़ेंगे, लेकिन हम आम देशवासी के लिए काम कर रहे हैं। पैसे के लिए नहीं, अब सोचिए ऐसे व्यक्ति को सरकार ने एनएसए लगाकर जेल में डाल दिया। अंत में यही कहा जा सकता है कि बहुत हो चुका। मोदी सरकार को देशवासी और कितना झेलेंगे? इस सरकार के जाने में ही देश और देशभक्त देशवासियों की भलाई है। यदि ऐसा नहीं होता है तो घमंड में चूर मोदी सरकार इसी तरह जिस व्यक्ति को भारत रत्न मिलना चाहिए उसे जेल का दरवाजा दिखाती रहेगी।
पूरा कार्यकाल, जीरो सवाल!
पूरा कार्यकाल, जीरो सवाल। सुनने में यह शब्द जरूर अजीब लग रहा है न, लेकिन यह सच्चाई है। हम बात कर रहे हैं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश से राज्यसभा सदस्य बने बनाए गए रंजन गोगोई की। यहां यह याद रखने वाली बात है कि बीजेपी ने रंजन गोगोई को जब राज्यसभा का सदस्य बनाया तो काफी विवाद सामने आया था, लेकिन लोगों को यह याद रखना चाहिए कि रंजन गोगोई को यह पद आराम से नहीं बल्कि, इनाम में मिला था। हो सकता है भविष्य में उन्हें राज्यपाल के पद से भी नवाजा जाए। क्योंकि रंजन गोगोई का कार्यकाल राज्यसभा से समाप्त हो चुका है। अपने ६ साल के कार्यकाल में उन्होंने एक भी सवाल नहीं उठाया है। एक भी मुद्दा नहीं उठाया है। उपस्थिति भी न के बराबर रही है। रंजन गोगोई को यह पद इनाम में क्यों मिला। इसे भी समझ लेते हैं। सुप्रीम कोर्ट का चीफ जस्टिस रहते हुए उन्होंने रफाल डील मामले में मोदी सरकार को क्लीन चीट दी। राम जन्मभूमि मामले में पैâसला सुनाया। इसके बाद रिटायर होने पर भाजपा ने उन्हें राज्यसभा पहुंचा दिया। कहा तो यहां तक जा रहा है कि अब उन्हें राज्यपाल बनने की तैयारी चल रही है। है न चमत्कार। जिस कोर्ट को लोग न्याय का मंदिर समझते हैं। न्याय के लिए माथा टेकते हैं। अब उस न्याय के मंदिर से ऐसे लोग निकलेंगे तो सवाल उठना लाजिमी है। कोर्ट के देवता यानी माननीय जज यानी आम भाषा में बोलें तो जस्टिस का एक और उदाहरण देखते हैं। पिछले साल दिल्ली हाई कोर्ट के माननीय जज यशवंत वर्मा के घर से ५०० के नोटों से भरे जले हुए बोरे पाए गए, लेकिन जज साहब का कुछ नहीं बिगड़ा। अब जज साहब इलाहाबाद हाई कोर्ट के माननीय जज के पद पर विराजमान हैं। हम यह कह सकते हैं कि जय हो ज्युडिशरी की।
