मुख्यपृष्ठनए समाचारहाफकिन में घोटाले की गूंज ... सरकारी खजाने से ‘साहब’ की ऐश!

हाफकिन में घोटाले की गूंज … सरकारी खजाने से ‘साहब’ की ऐश!

-फर्जी जांच और निजी कंपनी को वैक्सीन स्ट्रेन देने पर बवाल
-आदेश के बाद भी दोषियों पर कार्रवाई नहीं

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
महाराष्ट्र सरकार के प्रतिष्ठित सार्वजनिक उपक्रम हाफकिन बायो-फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन में कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मनमानी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि प्रबंध निदेशक ने सरकारी खजाने से अपने लिए लक्जरी फिटनेस उपकरण खरीदे, जबकि एंटी-करप्शन जांच में घिरे अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश होने के बावजूद उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि विधानसभा उपाध्यक्ष और मंत्री के स्पष्ट निर्देश भी अमल में नहीं आए और आरोपी अधिकारी अब भी बैठकों में शामिल हो रहे हैं। इसी बीच दुर्लभ डीपीटी वैक्सीन के सीड स्ट्रेन को निजी कंपनी को देने की प्रक्रिया शुरू होने से विवाद और गहरा गया है।
शिकायकर्ता विजय कुंभार ने आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि संस्थान के प्रबंध निदेशक ने सरकारी धन से अपने सरकारी आवास के लिए ट्रेडमिल, रिकंबेंट बाइक, वेट किट, सैमसंग एलईडी टीवी, मैकबुक प्रो और अन्य लक्जरी उपकरण खरीदे। उन्होंने बताया है कि दस्तावेजों के अनुसार इन उपकरणों की मांग सीधे एमडी कार्यालय से की गई, प्रशासनिक मंजूरी भी उसी कार्यालय से दी गई और खरीद प्रक्रिया केवल एक ही कोटेशन पर पूरी कर ली गई। इतना ही नहीं, निदेशक ने स्वयं उपकरण देखने के लिए शोरूम भी गए थे। बाद में मामला सामने आने पर इन्हें संस्थान के जिम के लिए खरीदा गया बताने की कोशिश की गई।
खरीद आदेश पर इनके हैं हस्ताक्षर
कुंभार ने कहा है कि खरीद आदेश पर कई अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं। खास बात यह है कि इन अधिकारियों के खिलाफ पहले ही विधानसभा के उपाध्यक्ष अण्णा बनसोडे और मंत्री नरहरी झिरवाल कार्रवाई के निर्देश दे चुके थे। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई और उलटे संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत कारणों से अतिरिक्त कार्यभार से मुक्त किए जाने का आदेश जारी कर दिया गया। इस कदम को दोषियों को बचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
बैठक में मौजूद थे अधिकारी
कुंभार के मुताबिक, मामला यहीं नहीं रुकता। एंटी करप्शन जांच में आरोपों का सामना कर रहे अधिकारी उमेश पवार, संपदा पटवर्धन और नवनाथ गर्जे, मंत्री नरहरी झिरवाल के कार्यालय में हुई बैठक में मौजूद पाए गए। सवाल उठ रहा है कि जिन अधिकारियों पर कार्रवाई का आदेश दिया गया था, वे बैठक में वैâसे शामिल हुए और आदेशों की अमलदारी किसने रोकी?
मुख्य सचिव को तीन बार पत्र लिखकर जांच की मांग
इसी बीच विधानसभा के उपाध्यक्ष अण्णा बनसोडे ने मुख्य सचिव को तीन बार पत्र लिखकर जांच की मांग की। लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, इससे सरकार की जवाबदेही और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उधर, एक और विवाद सामने आया है। हाफकिन बोर्ड की बैठक में डीपीटी वैक्सीन के दुर्लभ सीड स्ट्रेन को निजी कंपनी को देने की प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह जैविक संपत्ति सैकड़ों करोड़ रुपए मूल्य की है। सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी इतनी महत्वपूर्ण संस्था में लगातार सामने आ रहे आरोपों ने महायुति सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

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