मोनालिसा भोसले की शादी देश के नव-हिंदुत्ववादियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। ये नव-हिंदुत्ववादी कौन हैं? नथुराम गोडसे के जन्मदिन पर महात्मा गांधी पर गोलियां चलानेवाले, ‘हमें मुसलमानों के वोट नहीं चाहिए’, ‘हिंदुओं को मुसलमानों की दुकानों से खरीदारी नहीं करनी चाहिए’ ऐसा आह्वान करनेवाले, ऐसा खुलेआम कहनेवाले, लेकिन मतदान की पूर्व रात्रि मुस्लिम बस्तियों में जाकर सौदेबाजी करनेवाले, गोमांस घर में रखने के संदेह में मुसलमानों की लिंचिंग करनेवाले लोग मोनालिसा की शादी से चिंतित हो गए हैं। मोनालिसा की शादी के चलते देश में कई सवाल खड़े हो गए हैं। मानो खाड़ी देशों में युद्ध भड़कने से भारत में जो एलपीजी सिलेंडर की किल्लत पैदा हुई और सिलेंडरों के लिए जो कतारें लगीं, वे जैसे मोनालिसा की शादी के कारण ही पैदा हुई हैं। यदि मोनालिसा ने फरमान खान से शादी नहीं की होती तो भारत की सभी समस्याओं का समाधान चुटकी बजाते ही हो गया होता। इसलिए ‘मोनालिसा का क्या किया जाए?’ यह गंभीर प्रश्न भाजपा और तथाकथित हिंदुत्ववादियों के सामने तांडव कर रहा है। प्रयागराज के कुंभ मेले में रुद्राक्ष की माला बेचनेवाली मोनालिसा नाम की युवती ने सबका ध्यान खींचा था। उसकी आंखें बोलती और आकर्षक थीं ही, लेकिन उसकी बातों और मोहक मुस्कान ने सोशल मीडिया पर कई लोगों को घायल कर दिया था। उसे भरपूर प्रसिद्धि मिली। मोनालिसा मूल रूप से मध्य प्रदेश के खरगोन जिले की है। उसका उपनाम भोसले है, जो भटके-विमुक्त समाज से आता है। रुद्राक्ष और मोतियों की माला बेचने के लिए वह और उसका परिवार देशभर के तीर्थस्थलों और धार्मिक यात्राओं में भटकते रहते हैं। यही उनकी आजीविका का व्यवसाय है। प्रयागराज कुंभ मेले में रुद्राक्ष की माला बेचते हुए मोनालिसा का वीडियो वायरल हुआ, जिससे वह देश भर में काफी प्रसिद्ध हो गई। इसके बाद मोनालिसा को फिल्मों में काम करने के ‘ऑफर’ भी आए। आगे क्या हुआ, यह वही जाने। कई महीनों तक मोनालिसा का नाम सामने नहीं आया और अब अचानक मोनालिसा और फरमान खान द्वारा केरल के एक मंदिर में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार शादी करने की खबर से नव-हिंदुत्ववादियों के जीवन में भूकंप आ गया है। हमारे हाथों में
धर्म रक्षा की लाठियां
और तलवारें होते हुए मोनालिसा ने फरमान से शादी वैâसे कर ली? हिंदू समाज और संस्कृति की रक्षा की ‘ठेकेदारी’ इसके कारण संकट में आ गई है। इन लोगों ने स्यापा किया कि मोनालिसा और फरमान खान का विवाह ‘लव जिहाद’ है। इन लोगों का यह भी कहना है कि फरमान ने मोनालिसा को बहला-फुसलाकर भगाया है। भारतीय संविधान ने प्रत्येक वयस्क व्यक्ति को अपनी इच्छा के अनुसार, विवाह करने का अधिकार दिया है। कानूनन बाल विवाह और पति की मृत्यु के बाद सती होने पर पाबंदी है, लेकिन स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत अंतरधार्मिक और अंतरजातीय विवाह पर कोई रोक नहीं है। लेकिन जिन्हें संविधान मान्य नहीं है, उन्होंने लोगों के निजी जीवन में दखलअंदाजी शुरू कर दी है। मोनालिसा भोसले ने फरमान के साथ शादी की। उसने धर्म परिवर्तन नहीं किया, यह महत्वपूर्ण है। लेकिन हिंदी फिल्म जगत के कई बड़े कलाकारों ने दूसरी-तीसरी शादी करने के लिए सीधे इस्लाम स्वीकार किया और उन सभी कलाकारों को भाजपा ने सांसद और मंत्री बनाया। फिर वहां आपको ‘लव जिहाद’ मान्य क्यों? हिंदी के कई ‘खान’ मंडली ने हिंदू लड़कियों और अभिनेत्रियों से शादी कर घर बसाए और तोड़े भी, ये सभी सितारे भाजपा के मंचों पर सहजता से घूमते हैं। प्रधानमंत्री मोदी उन सभी को दुलारते हैं, लेकिन जब सामान्य परिवार में ऐसा विवाह होता है तो इन लोगों का पाखंडी हिंदुत्ववाद जाग जाता है और मोनालिसा जैसों की शादी उनके लिए धर्मद्रोह और ‘लव जिहाद’ बन जाती है। मोनालिसा भोसले ने कहा, ‘फरमान के साथ शादी मेरी मर्जी से हो रही है। हम एक-दूसरे से प्यार करते हैं। मेरे पिता ने मेरी शादी हमारी ही बिरादरी में तय की थी और वे मुझ पर शादी के लिए दबाव डाल रहे थे। जिसके साथ शादी तय हुई थी, वह मेरा भाई ही लगता था। उससे शादी करना मुझे स्वीकार नहीं था। मैं उस शादी में सुखी नहीं रहती। मैंने ही फरमान से शादी की जिद की, लेकिन अब हमारी जान को खतरा है इसलिए हम केरल में शरण लेने आए हैं।’ मोनालिसा का यह बयान काफी कुछ कहता है। मोनालिसा और उसका पति फरमान अब वैवाहिक बंधन में बंध गए हैं। मंदिर में उन्होंने वरमाला डाली। फरमान ने उसकी मांग में सिंदूर भरा। उन्होंने फेरे लिए, लेकिन
हिंदुत्ववादी नौसिखियों
का कहना है कि फरमान को अब धर्म परिवर्तन करना चाहिए। फिर से ‘मोनालिसा के ३५ टुकड़े होकर प्रिâज में मिलेंगे’ जैसी अभद्र भाषा ‘साध्वी’ कहलाने वालों द्वारा इस्तेमाल की गई, जो उचित नहीं है। इससे पहले हिंदू लड़कियों द्वारा मुस्लिम युवकों से की गई शादियां नहीं टिकीं। उन शादियों की त्रासदी ही हुई। उन लड़कियों की हत्याएं हुईं, लेकिन हिंदू युवतियों को हिंदू पतियों द्वारा खत्म किए जाने की घटनाएं भी हमारे समाज में आए दिन हो रही हैं। यह एक विकृति और अघोरी विचार है। क्या यह हिंदू संस्कृति पर आक्रमण है? तो निश्चित रूप से है, लेकिन यह आक्रमण सिर्फ ‘लव जिहाद’ के खिलाफ कानून बनाकर या संस्कृति रक्षकों की जंगली फौज बनाकर नहीं रुकेगा। भाजपा शासित राज्यों में अब धर्मांतरण विरोधी कानून आ ही गया है। महाराष्ट्र में भी इस कानून का प्रवेश हो रहा है, यह अच्छी ही बात है। हालांकि, इस कानून के समर्थकों का कहना है कि ‘लव जिहाद’ जैसी घटनाओं पर रोक लगेगी, लेकिन हमारे ही समाज में बढ़ते तलाक और महिलाओं पर होनेवाले अत्याचारों को कोई गंभीरता से नहीं देखता। धूमधाम से शादी करके फिर उस नई बहू को दहेज के लिए प्रताड़ित करने और लड़कियों को घर में न बसाने जैसी घटनाओं को भी ‘लव जिहाद’ जैसा मानकर उन पर उतनी ही कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। मोनालिसा भोसले की शादी से जिन्हें दुख हुआ है, उन्हें अपने धर्म की महिलाओं के आंसू भी समझने चाहिए। भावनाओं का जाल और मानव मन एक अजीब रसायन है। आसपास की सामाजिक स्थिति इसके लिए जिम्मेदार है। पुणे में सांसद मेधा कुलकर्णी ने मुस्लिम परिवार में शादी कर गई मराठी लड़की को फिर से हिंदू धर्म में वापस लाने का उत्सव मनाया, लेकिन वह लड़की भी अपनी मर्जी से ही शादी कर उस परिवार में गई थी। मोनालिसा भी वैसे ही गई। उसने अपनी खुशी ढूंढी, लेकिन सांस्कृतिक फौजदारों को यह धर्मसंकट लगता है। इन फौजदारों को मोनालिसा की शादी वैश्विक युद्ध, महंगाई, बेरोजगारी और भारत द्वारा स्वीकार की गई अमेरिका की गुलामी से भी बड़ा संकट लग रही है। जिन राजा-महाराजाओं ने अपना राज्य बचाने के लिए अपनी बेटियां मुगलों को दीं, उन राजा-महाराजाओं के अधिकांश वंशज आज भाजपा की छत्रछाया में हैं। ‘ऊंचे लोग, ऊंची पसंद!’ लेकिन मोनालिसा भोसले का जीना हराम हो गया है। फिलहाल इतना ही!
