भारतीय जनता पार्टी एक भ्रमित पार्टी है। देश में ईंधन और गैस सिलेंडर की कमी को लेकर उनका भ्रम स्पष्ट हो गया है। अंधभक्तों के लाडले प्रधानमंत्री मोदी ने तेल या गैस की किल्लत पर एक शब्द भी नहीं निकाला है, लेकिन उनके बुद्धिहीन प्रवक्ता इस बात की दूषित हवा पैâला रहे हैं कि देश में बिल्कुल भी गैस की किल्लत नहीं है। इस मामले में प्रधानमंत्री मोदी को बदनाम न करें। ‘संघर्ष रोकने की क्षमता केवल मोदी में ही है और ऐसा अमेरिका का मत है’, ऐसा मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपनी ओर से घोषित करके गजब का हास्य-विस्फोट कर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी संघर्ष रोक सकते हैं या गैस, ईंधन की कमी पर विजय पा सकते हैं, ऐसा अमेरिका के किस ‘डेढ़ शाने’ (अति-चतुर) ने कहा, यह देश को पता चलना ही चाहिए। मोदी या उनकी पार्टी ने अपने देश के लिए संघर्ष किया हो, इसका रिकॉर्ड इतिहास के किसी पन्ने पर नहीं है। पहलगाम हमले में २६ हिंदुओं की हत्या हुई। उसके बाद पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया गया, लेकिन वह संघर्ष भी राष्ट्रपति ट्रंप के दबाव के चलते मोदी ने बीच में ही रोक दिया। भाजपा और संघर्ष का दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। वे संघर्ष नहीं करते। इसलिए दूसरों के बीच का संघर्ष रोकने की क्षमता उनमें नहीं दिखती। अब मूल विषय की ओर चलते हैं। भाजपा के बुद्धिहीन प्रवक्ता दावा करते हैं कि भारत में बिल्कुल भी गैस की किल्लत नहीं है। क्या इसे भारत
सरकार की मान्यता
है? मुंबई के कई हिस्सों में घरेलू गैस सिलेंडर के लिए एक से डेढ़ किलोमीटर की लंबी कतारें लगी हैं। यह तस्वीर सिर्फ मुंबई-महाराष्ट्र की नहीं, बल्कि देशभर की है। लोग रात से ही सिलेंडर पाने के लिए कतार में खड़े हैं और मुख्यमंत्री फडणवीस कहते हैं, सब ठीक है। यानी लोग कतार में खड़े हैं, यह उन्हें ठीक लग रहा है। यदि गैस की किल्लत नहीं है तो ४० प्रतिशत मेस, रेस्टोरेंट और खाद्य पदार्थों की गाड़ियां बंद क्यों हो गई हैं और कई जगहों पर कोयले की दुकानों पर भीड़ क्यों उमड़ पड़ी है? कुछ छोटे होटलों में लकड़ियों पर खाना पकाया जा रहा है। सरकार ने अब ऐसा आदेश निकाला है कि जिन्हें पाइप के जरिए गैस आपूर्ति होती है, उन्हें एलपीजी कनेक्शन वापस करना होगा। इसका सीधा मतलब है सरकार ने ईंधन और गैस की किल्लत की इमरजेंसी घोषित कर दी है। सरकार ने घोषणा की कि अस्पताल, श्मशान घाट, शैक्षणिक संस्थान और सार्वजनिक सेवाओं को प्राथमिकता के आधार पर गैस की आपूर्ति की जाएगी। इसका अर्थ है कि सरकार ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि गैस की कमी बढ़ रही है। फिर भी भाजपा प्रवक्ता कहते हैं, ‘गैस’ की कमी नहीं है। सब ठीक है। मौजूदा ईंधन की कमी एक वैश्विक संकट है और जनता को उस संकट का सामना करना पड़ेगा। जनता की मानसिकता उस दृष्टि से तैयार करना आवश्यक है, लेकिन इस मुद्दे पर
सरकार झूठ
बोल रही है। झूठ बोलने से समस्या हल नहीं होगी। साई बाबा के शिर्डी संस्थान में प्रसाद के दो लड्डू दिए जाते थे। अब केवल एक ही लड्डू दिया जा रहा है। प्रसादालय की भोजन की थाली में भी कटौती की गई है। जब साक्षात संतों-देवताओं के दरबार में ही गैस की किल्लत की आंच पहुंच चुकी है, तब सरकार और भाजपा को झूठ बोलना बंद करना चाहिए। गैस सिलेंडर कालाबाजारी में पांच हजार रुपए तक पहुंच गए हैं। वैâटरिंग व्यवसाय पूरी तरह चरमरा गया है। होटलों के मेनू कार्ड से कई व्यंजन गायब हो गए हैं। वे गैस की कमी के कारण हुए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उनके प्रवक्ता कह रहे हैं कि सब ‘ऑल बेल’ (सब ठीक) है। कोरोना भगाने के लिए थालियां और बर्तन बजाने का उपक्रम मोदी जी ने तब जनता को दिया था। अब गैस सिलेंडर की किल्लत दूर करने के लिए क्या खाली सिलेंडर सड़क पर लाकर पीटने होंगे? मध्य प्रदेश में गैस सिलेंडर गोदामों और एजेंसियों को सशस्त्र पुलिस सुरक्षा देनी पड़ रही है। राजस्थान में सिलेंडर ले जाने वाले ट्रक और टेंपो रास्ते में रोके जा रहे हैं। दिल्ली की भीषण गर्मी में लोग ‘गैस’ के लिए कतार में हैं। मोदी की ‘काशी’ में मां अन्नपूर्णा की ‘रसोई’ गैस की कमी के कारण बंद हो गई। ऐसी तस्वीर होने के बावजूद यह चालाकी करना कि ‘देश में गैस की किल्लत नहीं है, बेकार में मोदी को बदनाम मत करो’, एक सामाजिक अपराध है। जो हुक्मरान लोगों को भरोसे में लेकर सच बताना नहीं जानते, वे राष्ट्र चलाने में अक्षम साबित होते हैं। भारत में वही हो रहा है। मोदी और उनके भक्तों को कम से कम भगवान से तो डरना चाहिए, बस इतनी ही मामूली अपेक्षा है।
