सगीर अंसारी / मुंबई
मुंबई शहर में व्यावसायिक गैस सिलिंडर की कमी का असर अब आम लोगों और मजदूरों की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है। गैस की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण मुंबई के कई छोटे होटल, ढाबे और चाय की टपरियां आंशिक रूप से बंद हो रही हैं या सीमित रूप से काम कर रही हैं। इसके चलते मजदूरों और दिहाड़ी कामगारों के सामने खाने की समस्या खड़ी होने लगी है।
मुंबई में बड़ी संख्या में मजदूर रोजाना छोटे होटल और टपरियों पर सस्ते खाने पर निर्भर रहते हैं, लेकिन गैस की कमी के कारण कई जगहों पर खाना बनना बंद हो गया है या केवल सीमित चीजें ही उपलब्ध हो पा रही हैं। ऐसे में मजदूरों के बीच चिंता का माहौल बन गया है।
रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर इन दिनों बड़ी संख्या में मजदूर अपने सामान के साथ अपने गांवों की ओर लौटते दिखाई दे रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि होटल बंद होने और खाने की व्यवस्था प्रभावित होने से उन्हें लॉकडाउन के दिनों की याद आने लगी है, जब अचानक काम बंद होने के साथ-साथ खाने-पीने की भी भारी किल्लत हो गई थी। कई मजदूरों ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान उन्हें कई दिनों तक भूखे रहना पड़ा था और सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर अपने गांवों तक पहुंचना पड़ा था।
अब गैस की कमी और होटल बंद होने की खबरों से वही डर फिर से उनके मन में घर करने लगा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो इसका असर मजदूरों और छोटे व्यवसायों दोनों पर पड़ेगा। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन को तुरंत कदम उठाकर गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि शहर में खाने-पीने की व्यवस्था प्रभावित न हो और मजदूरों के बीच पैâल रही आशंका को दूर किया जा सके।
