मुख्यपृष्ठनए समाचारअंधविश्वास की आड़ में शोषण ... ज्योतिषी निकला बलात्कारी! ...बरामद पेन ड्राइव...

अंधविश्वास की आड़ में शोषण … ज्योतिषी निकला बलात्कारी! …बरामद पेन ड्राइव में मिले ५८ आपत्तिजनक वीडियो

रामदिनेश यादव / मुंबई
महाराष्ट्र की राजनीति और समाज को झकझोर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। खुद को ज्योतिषी बताने वाले और सत्ता के गलियारों तक पहुंच रखने वाले पर अब गंभीर आपराधिक आरोप लगे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला आयोग की अध्यक्ष रुपाली चाकणकर का भविष्य देखने वाला ही महिलाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के मामले में पकड़ा गया है।
नासिक पुलिस ने स्वघोषित ज्योतिष अशोक खरात को गिरफ्तार किया है। उस पर बलात्कार और यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। जांच के दौरान पुलिस को एक पेन ड्राइव मिली, जिसमें कथित तौर पर ५८ आपत्तिजनक वीडियो बरामद हुए हैं। यह खुलासा अपने आप में पूरे मामले की भयावहता को दिखाता है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस कथित ज्योतिषी के पास कई राजनीतिक नेताओं की आवाजाही बताई जा रही है। अजीत पवार गुट के बड़े नेता सुनील तटकरे, रुपाली चाकणकर और मंत्री हसन मुश्रिफ जैसे नाम सामने आ रहे हैं। जिनके साथ वह अक्सर देखा गया है। इनके साथ उस ज्योतिषी की फोटो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई हैं। बताया जा रहा है कि कुछ नेताओं ने उसके कहने पर अंधविश्वास से भरे और चौंकाने वाले काम किए हैं। जैसे कि पूजा-पाठ से लेकर शरीर को नुकसान पहुंचाने तक की बातें चर्चा में हैं।
यह भी आरोप है कि इससे पहले जब एक संस्था ने अशोक खरात पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे, तब मामले को दबाने की कोशिश की गई। खासतौर पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर संबंधित संस्था पर दबाव बनवाया और माफीनामा दिलवाया। इतना ही नहीं, जिस संस्था की स्थापना खुद खरात ने की, उसमें भी चाकणकर के निदेशक के रूप में जुड़े होने की बात सामने आ रही है। यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति के अपराध तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्ता, अंधविश्वास और कथित संरक्षण के खतरनाक गठजोड़ की तरफ इशारा करता है। अगर आरोप सही हैं, तो यह सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता है।

कैसे मिलेगा महिलाओं को न्याय?
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या महिला आयोग जैसे संवेदनशील पद का इस्तेमाल किसी आरोपी को बचाने के लिए किया जा सकता है? अगर ऐसा हुआ तो महिलाओं को न्याय कैसे मिलेगा? इस पूरे विवाद के बीच राज्य की उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार का नाम भी चर्चा में है। एक महिला होने के नाते क्या वे इस मुद्दे पर कोई ठोस रुख लेंगी। क्या ऐसा भी सवाल उठ रहा है। इस मामले में राज्य की जनता भी देख रही है कि क्या कानून अपना काम करता है या फिर यह मामला भी राजनीतिक दबाव में ठंडे बस्ते में चला जाता है।

अन्य समाचार