द्रुप्ति झा
यह एक विडंबना है कि जिस देश में नारी को देवी समझा जाता है, उसी नारी को दहेज के लिए अपनी जान गंवानी पड़ती है। भारत आजाद हुए कई वर्ष हो चुके हैं, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि आज भी देश के कई राज्यों में महिलाएं दहेज प्रथा से मुक्त नहीं हो पाई हैं। यह एक कड़वी सच्चाई है कि दहेज प्रथा भारतीय समाज के लिए एक कलंक बनी हुई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, भारत में औसतन हर दिन १७ से २० महिलाएं दहेज के कारण अपनी जान गंवाती हैं। साल २०२२ में ही दहेज के कारण ६,००० से अधिक महिलाओं की हत्या कर दी गई। उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में दहेज हत्या के मामले सबसे अधिक दर्ज किए जाते हैं, लेकिन अब मुंबई में भी दहेज के लिए महिलाओं को प्रताड़ित करने के मामले सामने आते हुए नजर आ रहे हैं।
२०२५ के दिसंबर में विरार पश्चिम से ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जहां पर दहेज के लिए उसके पति और ननद ने महिला की हत्या कर दी गई थी। महिला ने दहेज वापस मांगा था और घर छोड़ना चाहती थी, जिसके बाद उस पर हमला किया गया। नवी मुंबई में एक महिला ने कथित तौर पर दहेज उत्पीड़न के कारण आत्महत्या की। उसके ससुराल वाले कार खरीदने के लिए १ लाख रुपए की मांग कर रहे थे। हाई-प्रोफाइल केस जहां पर २०२५ के जून में मुंबई पुलिस ने एक व्यक्ति और उसके माता-पिता के खिलाफ ५ करोड़ रुपए के उपहारों और दहेज की मांग के आरोप में शिकायत दर्ज की। २०२५ के जून में ही मुंबई की एक अदालत ने एक ७३ वर्षीय सास और अन्य को दहेज हत्या के मामले में दोषी ठहराया। भारत में दहेज लेना, देना और इसकी मांग करना कानूनन अपराध है।
