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हिंदुस्थानी बाजार पर विदेशी निवेशकों की ‘मिसाइल’! …मार्च में बाजार से ५२ हजार करोड़ रुपए साफ

-ईरान-इजराइल युद्ध से एफपीआई में भागमभाग
सामना संवाददाता / मुंबई
हिंदुस्थानी बाजार अब विदेशी निवेशकों के निशाने पर है। मध्य-पूर्व में भड़के युद्ध का असर यहां भी पड़ा है और एफपीआई यहां अपनी ‘मिसाइल’ दाग रहे हैं। इस मार्च महीने में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से ५२ हजार करोड़ रुपए निकाल लिए हैं।
बता दें कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, रुपए की कमजोरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने भारतीय शेयर बाजार से यह बड़ी रकम निकाल ली है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता और ऊंची तेल कीमतों के कारण निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान कम हुआ है, जिसके चलते हिंदुस्थानी बाजार से विदेशी पूंजी बाहर जा रही है।
डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में जारी बिकवाली से पहले फरवरी में विदेशी निवेशकों ने बाजार में २२,६१५ करोड़ रुपए का निवेश किया था। यह पिछले १७ महीनों में सबसे बड़ा मासिक निवेश था।

लगातार तीन महीने तक एफपीआई ने की बिकवाली

इन दिनों हिंदुस्थानी शेयर बाजार में विदेशी निवेशक खरीद से ज्यादा बिकवाली कर रहे हैं। गत जनवरी में उन्होंने ३५,९६२ करोड़ रुपए, दिसंबर में २२,६११ करोड़ रुपए और नवंबर में ३,७६५ करोड़ रुपए की निकासी की थी। इस तरह लगातार तीन महीनों तक उन्होंने बिकवाली की। अब चालू महीने के १३ मार्च तक एफपीआई ने नकद बाजार में करीब ५२,७०४ करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। उल्लेखनीय है कि इस महीने अब तक हर कारोबारी दिन विदेशी निवेशक शुद्ध विक्रेता बने रहे हैं। एंजेल वन के सीनियर फंडामेंटल एनालिस्ट वकार जावेद खान के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और लंबे समय तक संघर्ष की आशंका ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। उनका कहना है कि यदि यह तनाव महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावित करता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इसी आशंका के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत १०० डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है, जिससे बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी है। वकार जावेद खान के मुताबिक, रुपए की कमजोरी भी निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है और यह डॉलर के मुकाबले करीब ९२ रुपए के स्तर के आसपास बना हुआ है। इसके अलावा अमेरिका में बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर और पहले हुए निवेश के बाद मुनाफावसूली ने भी एफपीआई की बिकवाली को बढ़ावा दिया है।

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