मुख्यपृष्ठनए समाचारक्या सरकार आम जनता का निवाला छीनने की तैयारी में है?

क्या सरकार आम जनता का निवाला छीनने की तैयारी में है?

-गैस सिलेंडर की जमाखोरी और कालाबाजारी पर सदन में हंगामा

-सचिन अहीर ने भाजपा सरकार पर जमकर साधा निशाना

सामना संवाददाता / मुंबई

खाड़ी देशों में बढ़ते युद्ध के असर से देश में पैदा हो रहे गैस संकट को लेकर महाराष्ट्र विधान परिषद में बुधवार को केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला हुआ। विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि युद्ध की स्थिति का खामियाजा आम जनता और छोटे व्यवसायियों को भुगतना पड़ रहा है, जबकि सरकार ठोस उपाय करने में नाकाम रही है। ऐसे में क्या सरकार आम आदमी का निवाला छीनने की तैयारी में है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) विधायक सचिन अहीर ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि दो देशों के बीच चल रहे युद्ध की झलक पूरी दुनिया में दिखाई दे रही है। इसका सीधा असर हिंदुस्थान और महाराष्ट्र पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने एस्मा लागू कर कुछ कदम जरूर उठाए हैं, लेकिन इसके चलते व्यावसायिक एलपीजी आपूर्ति पर रोक का बड़ा खामियाजा छोटे होटल, ढाबों और लघु उद्योगों को भुगतना पड़ रहा है।
गैस की कमी का मुद्दा विधानमंडल में भी गूंजा!
गैस सिलेंडर का मामला कल विधानमंडल में भी गूंजा। विधान परिषद में शिवसेना विधायक सचिन अहीर ने कहा कि महानगरों में ७० से ८० प्रतिशत लोग रोजाना बाहर भोजन करते हैं। ऐसे में छोटे-मोटे होटल, बचत समूहों द्वारा चलाए जाने वाले भोजनालय, चिकी, पैकेजिंग और सूप जैसे छोटे उद्योग एलपीजी पर ही निर्भर हैं। यदि उन्हें गैस नहीं मिलेगी तो उनके व्यवसाय बंद होने के कगार पर पहुंच जाएंगे।
सचिन अहीर ने यह भी कहा कि गैस सिलेंडर की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं और अब पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। इससे जनता में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है। अहीर ने सरकार से मांग की कि स्थिति गंभीर होने से पहले वैâबिनेट स्तर पर चर्चा कर ठोस एहतियाती कदम उठाए जाएं।
सक्रिय हो सकता जमाखोरी का सिंडिकेट
सचिन अहीर ने यह भी आरोप लगाया कि पेट्रोल और गैस की जमाखोरी का सिंडिकेट सक्रिय हो सकता है। इसे रोकने के लिए सरकार को विशेष दल बनाकर कालाबाजारी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

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