एक से ज्यादा लेने पर भी दर्ज होगा मामला
सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य में गैस सिलेंडर की आपूर्ति को लेकर पैदा हुई अव्यवस्था पर अब सरकार की सटक गई है। गैस सिलेंडर धांधलेबाजी के खिलाफ महायुति सरकार ने सख्ती बरती है। गैस सिलेंडर की ब्लैक मार्वेâटिंग, जमाखोरी या जानबूझकर आपूर्ति में देरी करने वालों पर अब सीधे फौजदारी मामला दर्ज किया जाएगा। इतना ही नहीं, जरूरत से ज्यादा सिलेंडर लेने वालों पर भी प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगी और दोषियों को जेल भेजने में बिलकुल कोताही नहीं बरतेगी।
एलपीजी सिलेंडर की स्थिति गंभीर होने के बाद हर जिला परिषद में गैस कंपनियों, वितरकों, होटल व्यावसायियों और उद्योगपतियों की आपात बैठक बुलाई गई। इस बैठक में पालकमंत्री को समस्याओं पर चर्चा कर निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है। रायगढ़ में मंत्री उदय सामंत ने बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि गैस वितरण में किसी भी प्रकार का गैरव्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर किसी ने ब्लैक में सिलेंडर बेचा या जानबूझकर सप्लाई रोकी तो उसके खिलाफ सीधे पुलिस केस दर्ज होगा।
बैठक के बाद प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब गैस वितरण पर सख्त नजर रखी जाएगी।
सरकार ने १३ मार्च को जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिले में गैस आपूर्ति का नया फॉर्मूला लागू किया है। इसके तहत अत्यावश्यक सेवाओं को सबसे पहले गैस उपलब्ध कराई जाएगी। पालकमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिले में गैस की कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिश करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। अगर किसी वितरक या कंपनी की भूमिका संदिग्ध पाई गई तो सीधे केस दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस सख्त चेतावनी के बाद अब जिले में गैस सिलेंडर की ब्लैक मार्वेâटिंग करने वालों में खलबली मच गई है। नए नियमों के अनुसार, गैस आपूर्ति का बंटवारा होगा। अस्पताल, शैक्षणिक संस्थाएं, श्मशानभूमि, वृद्धाश्रम और अनाथाश्रम में १०० प्रतिशत गैस सिलेंडर की सप्लाई होगी। जबकि होटल-रेस्टोरेंट, रक्षा क्षेत्र, सरकारी व सार्वजनिक क्षेत्र, रेलवे, हवाई सेवा, पुलिस व जेल विभाग में ७० प्रतिशत सप्लाई होगी। बाकी ५० प्रतिशत प्रोसेसिंग उद्योग और मत्स्य पालन क्षेत्र को दिया जाएगा।
