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व्हाइट हाउस में गिरवी, मोदी की विदेश नीति! …आखिर भारत के फैसले ट्रंप क्यों ले रहे हैं?

-वेनेजुएला से तेल खरीदने के डोनाल्ड के
-बयान पर कांग्रेस ने साधा निशाना
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वेनेजुएला से तेल खरीद को लेकर दिए गए बयान के बाद भारत की विदेश नीति पर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि भारत के विदेश नीति से जुड़े पैâसले व्हाइट हाउस के इशारों पर तय हो रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि आखिर भारत जैसे संप्रभु देश के पैâसलों पर अमेरिकी राष्ट्रपति टिप्पणी क्यों कर रहे हैं और भारत के निर्णय ट्रंप क्यों लेते नजर आ रहे हैं। विपक्ष ने इसे भारत की कूटनीतिक स्वतंत्रता पर सीधा सवाल बताया है। विपक्ष सोशल मीडिया `एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा है कि क्या मोदी सरकार ने अपनी विदेश नीति व्हाइट हाउस में गिरवी रख दी है।
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल खरीदने को लेकर फिर से एक बार नया बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि चीन वेनेजुएला का तेल खरीदना चाहता है तो उसका `स्वागत’ है। भारत ने पहले ही तेल खरीदने की डील कर ली है। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, `चीन का स्वागत है, वह आए और तेल पर एक शानदार डील करे। हमने पहले ही एक डील कर ली है। भारत आ रहा है और वे ईरान से खरीदने के बजाय वेनेजुएला से तेल खरीदेंगे।’

`भारत के प्रधानमंत्री मोदी जी हैं या ट्रंप?’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान के बाद अब कांग्रेस ने मोदी सरकार से यह सवाल पूछा है कि आखिर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं या डोनाल्ड ट्रंप, जो हमेशा भारत के विदेश नीतियों पर नए-नए आदेश दे रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वेनेजुएला से तेल खरीद पर ट्रंप के बयान ने यह साफ कर दिया है कि मोदी सरकार की विदेश नीति अमेरिकी दबाव में काम कर रही है। वहीं सरकार की ओर से इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा गया है कि भारत अपनी विदेश नीति स्वतंत्र रूप से तय करता है और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं।

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